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  1. एक बार एक सम्मलेन में मैं गया हुआ था
    बात वह इश्क़ पर उठाया हुआ था
    याद आये मुझे वो दिन
    जब छत पर चढ़ता था रैन और दिन
    उसको देखा तो घायल हो गया
    उसकी मोहब्बत का कायल हो गया
    बड़ी मुश्किल से फेंका इज़हारे इश्क़ का फरमान
    सादगी से न कह कर तोड़ दिया दिल ए अरमान
    फिर भी देखती है हद से ज्यादा
    करता हु मैं तुझसे वादा
    टूट जाते है दिल हजारो के सैकड़ो बार
    फिर भी लोग समझते नहीं अँधा प्यार
    एक दिन इज़हारे इश्क़ तुझसे करवाऊंगा
    तू न मिली तो आगे बढ़ जाऊंगा

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