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तेरी आँखों में नहीं, तेरी रूह में बस्ता हूँ

तेरी दुआओं का असर है, जो अब तक मैं सलामत हूँ.!
तेरी आँखों की नमी नहीं, हाथों की लकीरों में बस्ता हूँ
मैं जानता हूँ जान-ए-जहाँ, तुझे बस मोहब्बत है मुझ से
तेरी साँसों की राह पकड़…., तेरी रूह में बस्ता हूँ….|

~ Ravinder Ravi (Sagar)

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7 Comments

  1. Sir Aapki Website Ka Yah Post Mujhe Bahut Pasand Aaya Aapne Waai Isame Bahut Achha Kaam Kiya Hai, Maine Aapki Site Par kai Naye Naye Shayariyo Ko Padha Jo Ki Maine Nahi Sune The Thaks Post Share Karne Ke Liye.

  2. ख़ुद मेरी आँखों से ओझल मेरी हस्ती हो गई.
    आईना तो साफ़ है तस्वीर धुँधली हो गई.
    साँस लेता हूँ तो चुभती हैं बदन में हड्डियाँ.
    रूह भी शायद मेरी अब मुझ से बाग़ी हो गई.

    • कम बोलो पर सब कुछ बता दो, ख़ुद ना रूठो और सबको हंसा दो, यही राज है जिन्दगी का, जियो और जीना सिखा दो

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