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Beautiful lines said by a Chahat-E-Musafir

शांति चाहता था मैं
पर शांति ढूंढ ना पाया।

एकता चाहता था मैं
पर एकता रख ना पाया।

सबमे समानता चाहता था मैं
पर जात पात को मिटा ना पाया।

रोज मंदिर भी जाता था मैं
पर सब में खुदा देख ना पाया।

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  1. छोटा बनके रहोगें तो, मिलेगी हर बड़ी रहमत दोस्तों
    बड़ा होने पर तो माँ भी, गोद से उतार देती है……..!!

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