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Women’s Day Shayari

महिला दिवस पर शायरी

मैं हूँ अपनी ही एकमात्र पहचान पूरी करती अब मैं अपने अरमान नहीं देखूं अब मैं कोई सहारा मैंने खुद अपना नसीब संवारा

8th March Happy Women’s Day Shayari

 

मैं हूँ अपनी ही एकमात्र पहचान
पूरी करती अब मैं अपने अरमान
नहीं देखूं अब मैं कोई सहारा
मैंने खुद अपना नसीब संवारा

Happy Women’s Day

 


 

महान औरत | 8th March Mahila Diwas par Special Poem

 

आदमी को आदमी बनाती है औरत
हर ज़ुल्म सहती रहती हैं औरत

वक़्त आने पर चंडी बन जाती है औरत
अंधे की लाठी बन जाती हैं औरत

छोड़कर बाबुल का घर जाती हैं औरत
बेबसी के आंसू पी जाती हैं औरत

कभी माँ बनकर ममता न्योछावर करती हैं औरत
तो कभी द्रोपती बनकर लूट जाती हैं औरत

कभी झाँसी की रानी बनकर रक्षा करती हैं औरत
कभी सुधा बनकर प्रेमरस बरसाती है साजन पे औरत

कभी दुर्गा बनकर शोले बरसाती हैं औरत
आज़ादी के इस युग में महान हैं औरत

कौन कहता हैं, की कमजोर हैं औरत?
आज के युग में सबसे महान है औरत

सभी औरतों को महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

~ रोज़ा

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