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Mohabbat aur Gurur

हे मोहब्बत तुझे किस बात पे गुरुर है,
तेरा साथ जो ना मिले तो तू किसे मंजूर है,
लोग तुझे बदनाम करते है,
और तू सोचती है की, ये मेरा कसूर है !!

 

~ राहुल मेहता

 

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कैद है मेरा प्यार इन दीवारो के पीछे

पहले इश्क़ करने को जमाना चाहिये था,
तुम मिली तो सब पुराना चाहिये था।
कैद है मेरा प्यार इन दीवारो के पीछे,
रिहा करने को दोस्तना चाहिये था।
मिल्कियत बनायी है मेहनत से मैने,
एक घर खड़ा करने को तुम्हे ज़माना चाहिये था।
सुना है काफी दिन से चुप हूँ मै,
मुहँ खुल्वाने को तुम्हे हँसाना चाहिये था।
लफ्ज़ कम नही होती इश्क़ मे कभी भी,
तुम्हे बस एक बार बताना चाहिये था।
महफ़ूज रहा हर आँसु पलको पर,
अब रोने को बस एक अफसाना चाहिये था।

 

– प्रखर तिवारी

 

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मनुष्य की लगन में रुकावट

LACK IN DILIGENCE…Could damage the men’s…FLOW OF RESISTANCE

 

 

MEANING in Hindi –

 

मनुष्य की लगन में रुकावट आना,
यही कारण मनुष्य की बाधा बन जाती है,
उसके शरीर में बाधा घातक विघुत धारा बनके तैरती है||

 

~ Ramdhun Singh

 

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आखरी खत शायरी

इश्क़ लफ़्ज़ों से आंखो में उतर आया है
जब हमें उसका आखरी खत आया है
खत में आंसू के निशान थे जहां-जहां
वहां-वहां शब्द-ए-वफा आया है
ये हाल है अब तो कि दस्तक
कोई भी दरवाज़े पे दे तो लगता है तु आया है

 

~ unknown

 

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ज़िक्र कुछ यार का किया जाये | Gazal

ग़ज़ल 1

ज़िक्र कुछ यार का किया जाये
ज़िन्दगी आ ज़रा जिया जाये हो
चुकी हो अगर सज़ा पूरी
दर्दे -दिल को रिहा किया जाये
चाँद छूने के ही बराबर है
मखमली हाथ छू लिया जाये
दर्द-ओ-ग़म की बहुत ज़रूरत है
चल कहीं दिल लगा लिया जाये
हसरतें ईद की अधूरी हैं
ख़ामुशी से जता दिया जाये

 


 

ग़ज़ल 2

 

इन्तिज़ार इन्तिज़ार है तो है एतिबार एतिबार है
तो है छोड़ कर मुझको सिर्फ़ इक वो चाँद हिज़्र का राज़दार है
तो है बावला दिल मेरी तो सुनता नहीं आपका इख़्तियार है
तो है मैं हूँ नादाँ अगर तो हूँ तो हूँ वो अगर होशियार है तो है
दीद का लुत्फ़ हो गया हासिल अब नज़र कर्ज़दार है तो है

 


 

ग़ज़ल 3

दर्द जब दिल का दुबाला हो गया
चेह्रा चेह्रा इक रिसाला हो गया
रात भर पढ़ते रहे हम चाँद को
आसमाँ इक पाठशाला हो गया
लोरियाँ माँ ने सुनाई और फिर
मेरे सपनों में उजाला हो गया
जब अना कुचली गई तो ये हुआ
आँख रोई दिल में छाला हो गया है
मुहब्बत आबे-ज़मज़म की तरह
पी लिया जिसने वो आला हो गया

 

– सारथी बैद्यनाथ

 

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कोरोना मुक्त विश्व बनाना है

दोस्त कुछ ही चाहिए, आगे तक साथ निभाने को।
अनगिनत न सही गिनती के, पर सुन सके अनकहे भावों को।
भीड़ है बहुत यहाँ .. सब अपने राग में मग्न हैं।
तुमसे ही विश्व बना है… तुमसे ही विश्व बना है…
अपने राग को छोड़ कर अब इस राग पर आना है।
अपने आप को सुरक्षित रख कर दूसरों को जिताना है..
कोरोना मुक्त विश्व बनाना है।
अब तक कितने अपनो को खोया? अब किसका इंतज़ार है?
अब और नहीं जाने देना जानें आओ ऐसी दोस्ती निभायें,
हम भी जीतें… और दूसरों को भी जितायें।
आओ सब मिलकर इसे अपनी आवाज़ बनाएं..

 

~ Urvashi soni

 

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आसुओं की बुँदे टपक रही हैं

जिन आखों से आज आसुओं की बुँदे टपक रही हैं,
कभी उन में से दरिया -ए- नूर बरसा करता था,
ये जो चारों और बंजर सा जमीन देख रहे हो ना
कभी यहां पर भी मुस्कुराहट का सैलाब हुआ करता था

 

~ Biswajit Rath

 

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यह लॉकडाउन नहीं जीवन रक्षक मंत्र है

लॉकडाउन यह लॉकडाउन नहीं जीवन रक्षक मंत्र है
जिससे बचना है हमें उसका नाम कोरोना षड्यंत्र है|

जिसने इसे बनाया वह तो है अपनी मस्ती में
अब यह फैल रहा हम लोगों की बस्ती में|

यह ना देखे जात पात ना ही देखे कोई धर्म
यह तो अपने चक्कर में सब को लपेटे चाहे राजा हो या रंक|

फैले ना ये सब जगह इसलिए इस्तेमाल करे सैनिटाइज व मास्क
इन दोनों को देखकर ही कोरोना दूर से ही जाता भाग|

ना हाथ मिलाये ना गले मिले बस कुछ दिन की तो बात
एक बार सब ठीक हो जाए फिर मिलते रहिए दिन रात|

आओ हम सब मिलकर ये पहल करें
दूर दार रहकर ही चहल करें|

यह लॉकडाउन नहीं जीवन रक्षक मंत्र है
जिससे बचना है हमे उसका नाम कोरोना षड्यंत्र है|

 

~ माही गुप्ता

 

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मैं अक्सर खुद से पूछता हूँ “मुझे क्या हो गया था”?

चलती हुयी राह से गुमराह हो गया था
ज़िन्दगी को लेकर बेपरवाह हो गया था

मैं अक्सर खुद से पूछता हूँ “मुझे क्या हो गया था”?

नींद से मेरा नाता टूट सा गया था
भूख प्यास से भी ये मन रूठ सा गया था

मैं अक्सर खुद से पूछता हूँ “मुझे क्या हो गया था”?

अकेलेपन से मानो प्यार हो गया था
एक सच्ची ख़ुशी के लिए दिल लाचार हो गया था

मैं अक्सर खुद से पूछता हूँ “मुझे क्या हो गया था”?

अपनों के बिच में अनजान हो गया था
बिना वजह आँखों में आंसू लाना बड़ा आसान हो गया था

मैं अक्सर खुद से पूछता हूँ “मुझे क्या हो गया था”?

आत्मविश्वास तोह मानों,.. जैसे खो गया था
आँखें तो खुली थी, मगर आत्मा कबका सो गया था

मैं अक्सर खुद से पूछता हूँ “मुझे क्या हो गया था”?

 

~ शैलजा

 

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मशगुल था वो अपने यारों में

मशगुल था वो अपने यारों में,
हम रात भर करवट बदलते रहे
सोया होगा वो थक हार के,
कह कर ये खुदको बहलाते रहे

 

बेरुखी तो देखिए अगली सुबह
हाल_ए_दिल भी ना जाना उसने
और पागलपन था मेरा, जो रात भर
उसे समझकर तकिए को सहलाते रहे

 

~ Poonam Vaishnav

 

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