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इंसान पर बेहतरीन पंक्तिया

देखने में तो बहुत आसान है, पर आसान नहीं है।
वह लगता है परेशान, पर परेशान नहीं है।
लानत है जो किसी के, कुछ काम नहीं आता।
कहे वह अपने को इंसान, पर वह इंसान नहीं है।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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ख्वाहिशों की उम्मीद में फिर से जीना सीख गई

 

ख्वाहिशे आज फिर मुझसे रूठ गई
तनहा रातों में आज फिर आंसु बनकर बह गई

कुछ था जो वो मेरे कानों में आकर कह गई
की ये तो वक्त की कुछ साजिशें थी, जिसमें तु फिर से उलझ गई

वो क्या रूठी मुझे लगा मेरी जिंदगी ही रूठ गई
पर फिर उस सुलगती शाम में फिर अनगिनत ख्वाहिशें बुन गई

जब ख्वाहिशें मुझ से रूठी तो उस से घायल तो जरूर हुई
पर उसी ख्वाहिशों की उम्मीद में फिर से जीना भी सीख गई।

 

~ Rinku patel

 

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मेरी मजबूरी को समझो मैं गुनाहगार नहीं

मेरी मजबूरी को समझो मैं गुनाहगार नहीं हूँ।
मैं सच्चाई के साथ हूँ, झूठ का पैरोकार नहीं हूँ।
भले ही तुम मेरी, मजबूरियां ना समझो।
मैं तुम्हारा साथी हूँ कोई अपराधियों का यार नहीं हूँ।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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कोरोना महामारी का बुरा दौर थम जाएगा

छतों पर पतंगों का, दौर फिर आएगा।
हर आदमी हंसेगा, और मुस्कुराएगा ।
आबाद होंगे गली, मोहल्ले चौराहे सब।
जब कोरोना महामारी का, बुरा दौर थम जाएगा।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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ज़िंदगी का कारवां यूं ही चलता गया

ज़िंदगी का कारवां यूं ही चलता गया
कोई हमदर्द और कोई ख़ुदगर्ज़ मिलता गया।
कभी ख़ुशियाँ थीं तो कभी दुख की बरसात हुई
बचपन से ज़वानी और फ़िर बुढ़ापे का सफ़र बढ़ता गया।।

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

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खेल सारा चमक धमक का

सपने भी देखे, और उन्हें सजाएं भी,
अपने भी देखे, और उनको अपना बनाएं भी।

सब दर्द पाल के, हसना सिखाया,
झुटे भी देखे और झुटलाए भी।

खेल सारा चमक धमक का था,
पैसे भी देखे और लुटाएं भी।

सब ने अपनी कहीं, रिश्ते नए बनाए,
धोखा हमे मिला, बादाम हमने खाए भी।

 

~ Vishal Gaikwad

 

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Izhaar karne se darta hu

तुमसे प्यार करता हूँ, तुम्ही पे मैं मरता हूँ
तुम्हारे लिए तो मैं हमेशा ही संवरता हूँ ।
पर जब इज्हार करने की बारी आती हैं मेरी,
नजाने क्यूँ मैं तुमसे बहुत ही ज्यादा डरता हूँ

 

~ Pratik Regmi

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मुझे फिर से एक बार मरना होगा

तुझे फिर से प्यार करना होगा,
तेरा फिर से ऐतबार करना होगा।

तेरे साथ जीने की आरज़ू में,
मुझे फिर से एक बार मरना होगा।

सरे आम मिली थी जो जिल्लत तुझसे,
मुझसे भूले नहीं भूली जाती।

सब भूल कर आगे बढ़ना होगा,
मुझे फिर से एक बार मरना होगा।

तेरा हर इल्ज़ाम मेरे दिल पर एक ज़ख्म है,
तेरे दिल में मेरे लिए नफरत ज़्यादा प्यार कम है।

आज हर उस ज़ख्म को भरना होगा,
मुझे फिर से एक बार मरना होगा।

मेरे आंसुओं में मेरी सच्चाई थी,
फिर मैंने तेरी कसम भी तो खायी थी।

तुझे ऐतबार मेरा आज करना होगा, वरना…
मुझे फिर से एक बार मरना होगा।
मुझे फिर से एक बार मरना होगा।।

 

~ निशा अरोड़ा (हिना)

 

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