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माँ बाप के लिए बच्चो को सीख

दो घड़ी के लिए

दो घड़ी के लिए, बैठ जाया करो।
मां बाप के पास भी कभी आया करो।

 

दो घड़ी के लिए……..।।

 

कभी उंगली पकड़कर, चलना सिखाया था।
कभी उनको भी बाहर घुमाया करो।

 

दो घड़ी के लिए…….।।

 

प्यार के दो बोल, अनमोल हैं।
प्यार से कभी तुम, मनाया करो।

 

दो घड़ी के लिए……..।।

 

माना तुम पढ़ लिखकर, इंसान हो गए।
कभी तो इंसानियत, दिखाया करो।

 

दो घड़ी के लिए……..।।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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जिंदगी अब बदल गई

माना कि जिंदगी अब बदल गई है,
वह मस्तानी शाम अब ढल गई है।
फिर भी जीवन जीने का नाम है,
कर्म करना ही तो अपना काम है।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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जीवन की सच्ची सीख

छुपाना मत हो कोई, गर राज़ दिल में।
दुख़ाना मत किसी का, दिल हो नाज़ुक सा।
सिख़ाना मत जो कोई, सीख़ने से दूर भागे।
बताना मत जो कोई, बात को दिल में न रख पाए।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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प्रेरणादायक शायरी अनुभव पर

हर कोई उड़ सकता है यदि मनुष्य ठान ले।
जो किताबों में लिख़ा है, ठीक से उसे मान ले।
तमाम लोगों ने भी, हौंसलों से उड़ान भरी है।
जिंदगी के कारवाँ में, अनुभवों से सब जान ले।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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निःस्वार्थ प्रेम और सच्चे रिश्तों का सिलसिला

जब तक लोगों के दिलों में निःस्वार्थ प्रेम पलता रहेगा।
तब तक सच्चे रिश्तों का सिलसिला चलता रहेगा।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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दिल को छूने वाली लाइन्स घर के बड़े और बुज़ुर्गों पर

बुज़ुर्गों की कीमत समझो, वे अमूल्य होते हैं।
अनुभव तमाम जीवन के, उनके करीब होते हैं।
माना कि आजकल लोग, इनको तवज्ज़ो नहीं देते।
पर जिनके साथ रहते हैं ये, वे बड़े ख़ुशनसीब होते हैं।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

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इंसान पर बेहतरीन पंक्तिया

देखने में तो बहुत आसान है, पर आसान नहीं है।
वह लगता है परेशान, पर परेशान नहीं है।
लानत है जो किसी के, कुछ काम नहीं आता।
कहे वह अपने को इंसान, पर वह इंसान नहीं है।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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