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मुश्किलों के दौर में थोड़ा संभल कर चलो

मुश्किलों के दौर में थोड़ा संभल कर चलो,
अनुभवों से सीख लो और निखर कर चलो।
कठिनाइयाँ तो आएंगी और चली जाएंगी,
सजग होकर इसी तरह नए सफ़र पर चलो।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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आज उनसे फिर मुलाकात हुई

आज उनसे फिर मुलाकात हुई,
बीती हुई बातें कुछ ख़ास हुई।
ख़ुशी दिल में थी और चेहरे पर गम था,
अचानक इसी मिलन में बरसात हुई।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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सपने जीवन में अनमोल होते हैं

नींद में सपने दिखाई देते हैं, कभी कुछ अपने दिखाई देते हैं।
सपने जीवन में अनमोल होते हैं, कभी सपने सच्चे दिखाई देते हैं।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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प्यार के गीत गाते रहो | जोश और उमंग से भरी कविता

प्यार के गीत गाते रहो
तुम सदा यूं ही मुस्कुराते रहो।

ज़िंदगी की बड़ी है कठिन डगर,
ख़ुशियों के गीत सदा गुनगुनाते रहो।

हंसते-हंसते ये रास्ता कट जाएगा,
गम का बादल सदा यूं ही छंट जाएगा।

प्रेम की डोर यूं ही पकड़ कर चलो,
कुछ ना कुछ बोझ जीवन का बंट जाएगा।

उदासी न हो ना ही अफ़सोस हो,
मन में यूं ही हमारे नया जोश हो।

प्रीत पलती रहे ज़िंदगी में सदा,
मन में अपने न कोई आक्रोश हो।

प्यार के गीत गाते रहो………….।।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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माँ बाप के लिए बच्चो को सीख

दो घड़ी के लिए

दो घड़ी के लिए, बैठ जाया करो।
मां बाप के पास भी कभी आया करो।

 

दो घड़ी के लिए……..।।

 

कभी उंगली पकड़कर, चलना सिखाया था।
कभी उनको भी बाहर घुमाया करो।

 

दो घड़ी के लिए…….।।

 

प्यार के दो बोल, अनमोल हैं।
प्यार से कभी तुम, मनाया करो।

 

दो घड़ी के लिए……..।।

 

माना तुम पढ़ लिखकर, इंसान हो गए।
कभी तो इंसानियत, दिखाया करो।

 

दो घड़ी के लिए……..।।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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जिंदगी अब बदल गई

माना कि जिंदगी अब बदल गई है,
वह मस्तानी शाम अब ढल गई है।
फिर भी जीवन जीने का नाम है,
कर्म करना ही तो अपना काम है।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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जीवन की सच्ची सीख

छुपाना मत हो कोई, गर राज़ दिल में।
दुख़ाना मत किसी का, दिल हो नाज़ुक सा।
सिख़ाना मत जो कोई, सीख़ने से दूर भागे।
बताना मत जो कोई, बात को दिल में न रख पाए।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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प्रेरणादायक शायरी अनुभव पर

हर कोई उड़ सकता है यदि मनुष्य ठान ले।
जो किताबों में लिख़ा है, ठीक से उसे मान ले।
तमाम लोगों ने भी, हौंसलों से उड़ान भरी है।
जिंदगी के कारवाँ में, अनुभवों से सब जान ले।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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