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झूठी शान और लालच | Very True Lines

हम स्वार्थ की ज़मीन पर नफरतों का बीज बो रहे हैं।
झूठी शान और लालच में हम रिश्तों को खो रहे हैं।।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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करीब होकर भी दूर

अगर वो कहता है तुम्हें बदलने को,
तो वो तुम्हें नहीं तुम्हारे बदले रूप को चाहता है,
होकर भी करीब तुम्हारे, वो तुम्हें अधूरा ही जान पाता है

 

~ Meri Pehchan

 

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हारकर भी ज़िन्दगी को जीतने का जज़्बा

हारकर खामोश हो गया ज़िन्दगी से, थककर चूर हो गया ज़िन्दगी से,
कोशिश फिर भी जारी है, अभी लड़ाई ख़त्म नहीं ज़िन्दगी से।

 

~ उमेश मुकाती

 

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