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जो जीते हैं सिर्फ़ अपनी खुशियों के लिए

जो जीते हैं सिर्फ़ अपनी खुशियों के लिए, उनके लिए रिश्तों का मोल होता नहीं है।
खो जाते हैं वो किसी दूसरी दुनिया में, वास्तव में उनके लिए कोई रोता नहीं है।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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उनको पहचानने से मुकर गए

महफिल में हम भी उनको पहचानने से मुकर गए,
महफिल में हम भी उनको पहचानने से मुकर गए,
जब वह भी अनदेखा कर, नजदीक से गुजर गए ll

 

~ रवि कुमार गहतराज

 

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पाना भी नही चाहता और खोने से भी डरता है

वफ़ा भी नही करता वो बेवफ़ा होने से भी डरता हैं
मुझे पाना भी नही चाहता और मुझे खोने से भी डरता है

 

~ Pari

 

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