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Kuch to andar se toot raha hai

जीने की चाह में, जीवन छूट रहा है
कुछ तो हैं, जो अंदर से टूट रहा हैं
हसरते कब उठी, कब शांत हो गयी
ज़िन्दगी गुल से, कब बेजान हो गयी
ऐसा नहीं की, खिलने की चाह नहीं, पर
कुछ तो है जो अंदर से टूट रहा हैं
जीने की चाहत में, जीवन छूट रहा है

 

~ मोहिनी

 


 

Jeene ki chah mein, jeevan chhut raha hai
Kuch toh hain, Jo andar se toot raha hai
Hasrate kab uthi, kab shaant ho gayi
Zindagi gul se, kab bejaan ho gayi
Aisa nahi ki, khilne ki chah nahi Par,
Kuch to hai Jo andar se toot raha hai
Jeene ki chahat me, jivan chhut raha hai

 

~ Mohini

 

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चुप रहने की कीमत | Deep Sad Lines

सपने तो बहुत अच्छे अच्छे दिखे हैं
पर ना जाने हक़ीक़त क्या होगी
चुप रहने की कीमत तो चुकाली
अब अगर बोल दू तो कीमत क्या होगी

~ अर्शी

 


Sapne to bahut acche acche dikhe h
Par naa jaane haqiqat kya hogi
Chup rehne ki keemat to chukali
Ab agr bol du to keemat kya hogi

~ Arshi

 

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अपने ही आँसुओं की वजह

कुछ दर्द जो दिल में घर कर गए…
कुछ आसूँ जो आँखों से छलक गए…
अपने दिल का दर्द हम बताते भी किसको…?
जब अपने ही उन आँसुओं की वजह बन गए!!

~ आयुषी शर्मा

 

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ऐतबार -ए- मोहब्बत में इस कदर टूटे

ऐतबार – ए – मोहब्बत में इस कदर टूटे है, कि……..,
सुकून-ए-दिल की तलाश में ना जाने कहां-कहां भटके है

 

~ आयुषी शर्मा

 

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राज मत पूछो उन्हें क्यों चाहता है दिल

राज मत पूछो उन्हें क्यों चाहता है दिल,
गर बता देंगे हकीकत आप भी जाओगे हिल।
इसलिए होंठो को हमने अब दिया है सिल,
ताकि भरते घाव कोई फिर न पाये छिल।

 

~ डॉ सतीश चन्द्र पाण्डेय

 

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खुद रो कर भी सभी को हंसा कर आया हूँ

खुद रो कर भी सभी को हंसा कर आया हूँ
मैं अपने दिल के दर्द को शायरी में सुना कर आया हूँ
और मुझे पाने की चाहत वो ही नहीं रखती
जिसके लिए मैं महफिलों को ठुकराकर आया हूँ

 

~ हरमीत सिंह

 

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अब तो मन भी रेगिस्तान जैसा

दिन कटता नहीं अब रात नहीं होती, तेरी मेरी कोई मुलाकात नहीं होती।
अब तो मन भी रेगिस्तान जैसा है, खुशियों की अब बरसात नहीं होती।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘बरसाने’

 

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गिराया जिसे अपनों ने

गिराया जिसे अपनों ने वो उठकर फिर क्या करता
परायों से जो लड़ा नहीं वो अपनों से क्या लड़ता

~ अतुल शर्मा

 


 

Giraya jise apno ne Wo uthkar fir kya karta
Parayo se jo lada nahi Wo Apno se kya ladta

~ Atul Sharma

 

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अपनों ने ही किया क़त्ल मेरी इच्छाओं का

बहुत दिन हो गए देखते देखते
अब मैं भी कुछ कहना चाहता हूँ,

नादान था मैं….

नहीं था अंदाज़ा ज़माने के रीति रिवाज़ो का
वक़्त ने संघर्ष से सिखाया रुख परखना हवाओं का

फर्क नहीं पड़ा मुझपे दूसरों की बद्दुआओं का
अपनों ने ही किया क़त्ल मेरी इच्छाओं का

 

~ अतुल शर्मा

 


 

Bahut din ho gaye, dekhte dekhte,
Ab Main bhi kuch kahna chahta hu,
Naadan tha main…

Nahi tha andaja jamane ke reeti rivazo kaa…
Waqt ne struggle se sikhaya rukh parakhna hawao ka..

Fark ni pda mujhpe doosron ki badduao ka,
Apno ne hi kiya qatl meri icchao ka….

 

~ Atul Sharma

 

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