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हिस्सों में बट चुका है किरदार मेरा

कभी मुख्तसर खुशी कभी इंतहा ए ग़म हूं मैं
कभी ज़ख्मों की वजह तो कभी मरहम हूं मैं
इतने हिस्सों में बट चुका है किरदार मेरा
की आजकल मैं थोड़ा कम हूं मैं ।।

 

~ निर्मल

 

 

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क्या क्या सितम

अधुरे ज़ज्बात, अधुरे लफ़्ज और अधुरी बात
अभी तो कितने ही सवाल मेरे यार बाकी हैं
अधुरी यादें, अधुरे ख्वाब और ये आधी रात
अब और क्या क्या सितम मेरे यार बाकी हैं

 

~ लीलाधर गोस्वामी

 

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एक नज़र भी ना देखें वो मेरी तरफ़

हाल अपना सुनाएं हम कैसे उन्हें,
वो तो ग़ैरों की महफ़िल में रमे जा रहे।
एक नज़र भी ना देखें वो मेरी तरफ़,
बेरुखी से हम उनकी मरे जा रहे।।

 

~ महेश ओझा (Mahesh Ojha)

 

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एक अजनबी के घर में गुजारी है जिंदगी

एक अजनबी के घर में गुजारी है जिंदगी |
लगता है जैसे सफर में गुजारी है जिंदगी |
ये और बात है कि मैं तुझसे दूर हूँ,
लेकिन तेरे अशर में गुजारी है जिंदगी |

 

~ अब्दुल रहमान अंसारी (रहमान काका)

 

 

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उनको पहचानने से मुकर गए

महफिल में हम भी उनको पहचानने से मुकर गए,
महफिल में हम भी उनको पहचानने से मुकर गए,
जब वह भी अनदेखा कर, नजदीक से गुजर गए ll

 

~ रवि कुमार गहतराज

 

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दोस्ती निभाने की सजा

गैरों के चेहरों पर भी मुस्कान सजाई थी हमने
पर यहाँ तो नजर तक लग जाती हैं ज़माने की
क्या बताऊँ तुझे हाल-ए-दिल अपने ए-दोस्त..
यहाँ सजाये मिलती हैं दोस्ती दिल से निभाने की

~ ख्वाइश

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आखरी मुलाक़ात के बाद भी उसका याद आना

किसी को पा कर भी दूर रहना हमसे पूछो,
क्या होती हैं किस्मत में रुकावट हमसे पूछो,
यहाँ कहने को तो सब कुछ अपना हैं लेकिन,
आखरी मुलाक़ात के बाद भी उसका याद आना हमसे पूछो

 

~ रवि भल्ला

 

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मंदिर का मेरे भगवान कहाँ हैं

शायर सी मेरी पहचान कहाँ हैं
किराये का मेरा मकान कहाँ हैं

जान दे दे यहाँ किसी के लिए
अब इतनी किसी में जान कहाँ हैं

दिल से बेघर हुए लापता भी हुए
कौन जाने मेरे अरमान कहाँ हैं

सिर्फ सुनते रहे जो बेगम की हम
आज ढूढ़ा किये खानदान कहाँ हैं

पुजारी ने थाने में लिखाये रिपोर्ट
मंदिर का मेरे भगवान कहाँ हैं

 

~ साजिद घायल

 

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