1

मेहबूब की याद में रोती हुयी आँखों पर शायरी

रात भर रोती रही वो आँखें,
जाने किसकी याद में जागती रही वो आँखें।

अश्को की अब क्या कीमत लगायी जाये
की हर आंसू के गिरते,
किसी को पुकारती रही वो आँखें।

पलकों पे तस्वीर लिए मेहबूब का,
तरसती रही वो आँखें।

कहना चाहा बहुत कुछ,
पर खामोश रही वो आँखें।

उन आँखों को चाहिए था दीदार अपने मेहबूब का
जो रूठ के चला गया हैं कही दूर,
उसके लौट आने की राह तख्ती रही वो आँखें..।।

3

तनहा मौसम और उदास रात की शायरी

तन्हा मौसम है और उदास ‪‎रात‬ है
वो मिल के बिछड़ गये ये ‪‎कैसी मुलाक़ात‬ है,
दिल धड़क तो रहा है मगर ‎आवाज़‬ नही है,
वो धड़कन भी साथ ले गये ‎कितनी अजीब‬ बात है!

2

प्यार में धोखा और बेवफा पर शायरी

बेवफा तो वो खुद थी,
पर इलज़ाम किसी और को देती हैं

पहले नाम था मेरा उसके होंठो पर,
अब वो नाम किसी और का लेती हैं,

कभी लेती थी वादा मुझसे साथ ना छोड़ने का
अब यही वादा वो किसी और से लेती हैं..||

0

रौशनी के लिए दिल जलाये जाते हैं

बारिशों का क्या हैं, आजकल तो आँखों से बरसती हैं
तन्हाई में महफ़िल आखिर कहाँ सजा करती हैं
शंमायें भुझती हैं, और परवाने पिघलते हैं….
लोग तो रौशनी के लिए अपना दिल जलाये जाते हैं

2

गर नजरो ने तेरी यूँ गिराया ना होता

ज़ख्मो पे मरहम कभी लगाया तो होता
मेरे आंसुओ के लिए दामन बिछाया तो होता

बदनामियों के बोझ से जब गर्दन झुक गयी
कन्धा अपना तुमने बढ़ाया तो होता

गिर गिर के संभल जाते फिर गिरने के लिए
अगर नजरो ने तेरी यूँ गिराया ना होता

Page 1 of 21
1 2 3 4 5 6 21