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बीते हुए लम्हो के साथ तुम्हारी याद बहुत आयी

पर तुम्हारी याद बहुत आयी
पर तुम्हारी याद बहुत आयी

बीते हुए लम्हो के साथ फिर लौट आयी
पर तुम्हारी याद बहुत आयी

किताबों से भी निकल कर आयी
कभी खामोसी के साथ आयी

पर तुम्हारी याद बहुत आयी
कभी आँखों में आंसू बनकर आयी

तो कभी छू लेती मेरे दिल की गहरायी
पर तुम्हारी याद बहुत आयी

 

~ मनीषा सोलंकी

 

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मेरी ज़िन्दगी हैं तू

ग़म है या ख़ुशी है, पर मेरी ज़िन्दगी हैं तू..
आफतों के दौर में, चैन की घडी हैं तू..
मेरी रात का चराग, मेरी नींद भी हैं तू..
मैं फिजा की शाम हूँ, रूत बहार की हैं तू..
दोस्तों के दरमियान, वजह-ए-दोस्ती है तू..
मेरी सारी उम्र में, एक ही कमी हैं तू..

 

~ अज़ीम आजाद

 

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दो रूहों का प्यार अब कहां रहा

जिस्मों से मोहब्बत हो रही है…
दो रूहों का प्यार अब कहां रहा…

न रहे वो आशिक पहले जैसे…
मर मिटने का खुमार अब कहां रहा…

जिस्मों से मोहब्बत हो रही है…
दो रूहों का प्यार अब कहां रहा…

 

~ Akshat

 

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जब वो आती हैं

जब भी मिलने आती है, वो सामां छोड़ जाती है,
मेरी गर्दन पे, अपने लब, बना के छोड़ जाती है।

न जाने कौन सा तूफां उमड़ता, उसके आने पे,
जाती है तो हरदम, मुझको बेजां छोड़ जाती है।

अकीदत है, कि मुझसे बारहा वो पूछती है पर,
अरमां ले के आती है औ’ अरमां छोड़ जाती है।

आती ख़ुद नही जब, याद अपनी छोड़ जाती है,
मुश्किल जिंदगी को, ऐसे आसां छोड़ जाती है।

दिया तो है यकीनन ज़िन्दगी का वास्ता मुझको,
अधूरा हर दफ़ा किस्सा, मेरी जां छोड़ जाती है।

 

~ Anupam Shah

 

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तुम हमसे इश्क़ कर बैठे हो

तुम ख़ामोशी की जुबां समझ लेते हो,
हमारी शाम को तुम सवार देते हो
तुम चाहे गुजारिश ना करो इस बात की,
हमे भी एतियात हैं तुम हमसे इश्क़ कर बैठे हो

 

~ शहज़ाद

 

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नहीं रही कोई आरज़ू दिल में, जब मेरे पास तुम हो

सफर सुहाना जो तुम साथ हो,
रहूँ दीवाना जो हाथों में हाथ हो
बस नहीं रही कोई आरज़ू दिल में,
जबसे मान लिया हमने मेरे पास तुम हो

 

~ Shahezad

 

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