0

ज़िन्दगी की कदर करो

इतनी सी है जिंदगी कदर कर प्यारे
कल तो सबको जाना ही है सब्र कर प्यारे
दो पल की है जिंदगी जी तो ले पहले
वहीं मोड पे जाना है गुजर कर प्यारे

 

~ शालू बनकर

 

 

Share This
0

कहीं अंधेरा, कहीं उजाला

कहीं अंधेरा, कहीं उजाला
कहीं धुप, कहीं छांव हैं।
कहीं अमीरी तो कहीं नंगे पांव हैं।

इस सृष्टि का खेल अनजाना,
कहीं रूठना तो कहीं मनाना,
कहीं हँसना तो कहीं हंसाना।

चली आ रही सदा से ये रीत,
कहीं शिक्षा सही तो कहीं गलत सीख।

खुशियाँ हैं अपार कहीं,
तो कहीं गमों की झार हैं।
यही तो संसार हैं,
यही तो संसार हैं।

 

~ Yograj Jangir Bagora

 

Share This
0

जो जीते हैं सिर्फ़ अपनी खुशियों के लिए

जो जीते हैं सिर्फ़ अपनी खुशियों के लिए, उनके लिए रिश्तों का मोल होता नहीं है।
खो जाते हैं वो किसी दूसरी दुनिया में, वास्तव में उनके लिए कोई रोता नहीं है।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

Share This
0

कामयाबी मिले भी तो कैसे मिले

हमारे देश के लोग बच्चे की काबिलियत को नहीं बस अपने फायदे को देख लेते हैं
एक बच्चा जो क्रिकेटर बनना चाहता हैं उसे IIT, Neet जैसी कोचिंग भेज देते हैं
कामयाबी मिले भी तो मिले कैसे, अरे कामयाबी मिले भी तो कैसे मिले
ये मछली को आसमान में और पंछी को तालाब में फेंक देते हैं……
हमारे देश के लोग बच्चे की काबिलियत को नहीं बस अपने फायदे को देख लेते हैं

 

~ Deepak Jat

 

Share This
0

ज़िन्दगी का हर दिन है बहार

खूबसूरत बहुत है दुनिया, नज़रिया बदल के तो देख एक बार।
रोने के होंगे सौ कारण बेशक, पर तू हंसने के कारण तो ढूंढ यार।
कभी वक्त बिता अपने साथ भी, कभी किसी की खुशी पर कर दिल निसार।
उमंग जब है तेरे मन में तो, इस ज़िन्दगी का हर दिन है बहार।

 

~ Mahira

 

Share This
0

हारकर भी ज़िन्दगी को जीतने का जज़्बा

हारकर खामोश हो गया ज़िन्दगी से, थककर चूर हो गया ज़िन्दगी से,
कोशिश फिर भी जारी है, अभी लड़ाई ख़त्म नहीं ज़िन्दगी से।

 

~ उमेश मुकाती

 

Share This
2

ज़िंदगी जीने का नया ढ़ंग होना चाहिए

ज़िंदगी में रंग और उमंग होना चाहिए,
एक सच्चा हमसफर भी संग होना चाहिए
माता पिता, गुरुओं का आशीष बना रहे,
ज़िंदगी जीने का नया ढ़ंग होना चाहिए।

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

Share This
0

मुश्किलों के दौर में थोड़ा संभल कर चलो

मुश्किलों के दौर में थोड़ा संभल कर चलो,
अनुभवों से सीख लो और निखर कर चलो।
कठिनाइयाँ तो आएंगी और चली जाएंगी,
सजग होकर इसी तरह नए सफ़र पर चलो।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

Share This
0

जिंदगी अब बदल गई

माना कि जिंदगी अब बदल गई है,
वह मस्तानी शाम अब ढल गई है।
फिर भी जीवन जीने का नाम है,
कर्म करना ही तो अपना काम है।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

Share This
Page 1 of 7
1 2 3 4 5 6 7