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मेरी ख्वाइश कुछ ऐसी हो

मैं खुद ही खुद को बयां करती हूं, अजीब सी लड़की हूं जाने क्या-क्या ही चाहती हूं,
छोटी – छोटी आंखों में सपने हजार देख के मुसाफिर बनना चाहती हूं,

है रस्ते अनजान फिर भी बेफ्रिक होकर मंजिल ढूंढना चाहती हूं
खोने का डर नहीं बस सपने पूरा करना चाहतीं हूं

दे साथ गर कोई जिंदगीभर शुक्रगुजार होना चाहती हूं
यूंह तो ख्वाइशें हर दिन बदलती रहती हैं

पर मेरी ख्वाइश कुछ ऐसी हो की बस उसी में खोकर रहना चाहती हूं…
मैं खुद को बस खुद ही से बयान करना चाहती हूं।

~ Dr.Ruchika Mehta

 

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सूरज की रौशनी फीकी पड़ जाए ऐसी चांदनी रात होनी चाहिए

सूरज की रौशनी फीकी पड़ जाए
ऐसी भी कोई चांदनी रात होनी चाहिए

आँखों में गुम हो जाऊ तुम्हारी,
ऐसी भी कोई बात होनी चाहिए

पीठ पीछे तो सब बोलते है मेरी जान
जो सामने बोलके दिखाए वो औकात होनी चाहिए

झुकता नहीं सर यूँही किसी डर के आगे
हर सर झुक जाये उस डर में वो बात होनी चाहिए

 

~ Pari

 

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तू दर्द हैं या मलहम

ख़्वाबों की एक लहर उठी, डूबा जिसमे तन और मन
थम सा गया वक़्त और रुक से गए हम

ना जाने जिस असमंजस में, उलझ चूका हैं ये बावला दिल
पता नहीं चलता, तू दर्द हैं या मलहम

काश ना आते तुम, ज़िन्दगी में ख़ुशी की बहार लेकर
काश ना जाते तुम, दिल पर ये गहरा घाव देकर

काश ना मिलते कभी, हो जाते कही गुम
हर शाम हैं रूठी, हर दिन हैं अधूरा

ना जाने जिस असमंजस में, उलझ चूका हैं ये बावला दिल
पता नहीं चलता, तू दर्द हैं या मलहम

 

~ Sanobar

 

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इन खुशियों को मेरी ही नजर ना लग जाये

तेरी एक मुस्कराहट से ये पूरी दुनिया सज जाए,
तू जब बोले तो मेरे कानो में शहनाई बज जाए |
जब से तू आयी है मेरी जिन्दगी में,
कसम से आईना भी देखने से डरता हू कि
कहीं इन खुशियों को मेरी ही नजर ना लग जाये

 

~ Tanishq Agrawal

 

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कैद है मेरा प्यार इन दीवारो के पीछे

पहले इश्क़ करने को जमाना चाहिये था,
तुम मिली तो सब पुराना चाहिये था।
कैद है मेरा प्यार इन दीवारो के पीछे,
रिहा करने को दोस्तना चाहिये था।
मिल्कियत बनायी है मेहनत से मैने,
एक घर खड़ा करने को तुम्हे ज़माना चाहिये था।
सुना है काफी दिन से चुप हूँ मै,
मुहँ खुल्वाने को तुम्हे हँसाना चाहिये था।
लफ्ज़ कम नही होती इश्क़ मे कभी भी,
तुम्हे बस एक बार बताना चाहिये था।
महफ़ूज रहा हर आँसु पलको पर,
अब रोने को बस एक अफसाना चाहिये था।

 

– प्रखर तिवारी

 

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मनुष्य की लगन में रुकावट

LACK IN DILIGENCE…Could damage the men’s…FLOW OF RESISTANCE

 

 

MEANING in Hindi –

 

मनुष्य की लगन में रुकावट आना,
यही कारण मनुष्य की बाधा बन जाती है,
उसके शरीर में बाधा घातक विघुत धारा बनके तैरती है||

 

~ Ramdhun Singh

 

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ज़िक्र कुछ यार का किया जाये | Gazal

ग़ज़ल 1

ज़िक्र कुछ यार का किया जाये
ज़िन्दगी आ ज़रा जिया जाये हो
चुकी हो अगर सज़ा पूरी
दर्दे -दिल को रिहा किया जाये
चाँद छूने के ही बराबर है
मखमली हाथ छू लिया जाये
दर्द-ओ-ग़म की बहुत ज़रूरत है
चल कहीं दिल लगा लिया जाये
हसरतें ईद की अधूरी हैं
ख़ामुशी से जता दिया जाये

 


 

ग़ज़ल 2

 

इन्तिज़ार इन्तिज़ार है तो है एतिबार एतिबार है
तो है छोड़ कर मुझको सिर्फ़ इक वो चाँद हिज़्र का राज़दार है
तो है बावला दिल मेरी तो सुनता नहीं आपका इख़्तियार है
तो है मैं हूँ नादाँ अगर तो हूँ तो हूँ वो अगर होशियार है तो है
दीद का लुत्फ़ हो गया हासिल अब नज़र कर्ज़दार है तो है

 


 

ग़ज़ल 3

दर्द जब दिल का दुबाला हो गया
चेह्रा चेह्रा इक रिसाला हो गया
रात भर पढ़ते रहे हम चाँद को
आसमाँ इक पाठशाला हो गया
लोरियाँ माँ ने सुनाई और फिर
मेरे सपनों में उजाला हो गया
जब अना कुचली गई तो ये हुआ
आँख रोई दिल में छाला हो गया है
मुहब्बत आबे-ज़मज़म की तरह
पी लिया जिसने वो आला हो गया

 

– सारथी बैद्यनाथ

 

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कोरोना मुक्त विश्व बनाना है

दोस्त कुछ ही चाहिए, आगे तक साथ निभाने को।
अनगिनत न सही गिनती के, पर सुन सके अनकहे भावों को।
भीड़ है बहुत यहाँ .. सब अपने राग में मग्न हैं।
तुमसे ही विश्व बना है… तुमसे ही विश्व बना है…
अपने राग को छोड़ कर अब इस राग पर आना है।
अपने आप को सुरक्षित रख कर दूसरों को जिताना है..
कोरोना मुक्त विश्व बनाना है।
अब तक कितने अपनो को खोया? अब किसका इंतज़ार है?
अब और नहीं जाने देना जानें आओ ऐसी दोस्ती निभायें,
हम भी जीतें… और दूसरों को भी जितायें।
आओ सब मिलकर इसे अपनी आवाज़ बनाएं..

 

~ Urvashi soni

 

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Heart Touching True But Sad Corona Shayari

Heart Touching Corona Shayari

 

गुजर रही हैं ज़िन्दगी ऐसे मुकाम से,
अपने भी दूर हो जाते हैं जरा सी झुकाम से
तमाम कायनात में एक कातिल बीमारी की हवा हो गयी
वक़्त ने कैसा सितम ढाया की “दूरिया ही दवा” हो गयी

~ unknown

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घर के बुजुर्ग, त्यौहार और प्यार

नफ़रतें छोड़कर मन से, प्रेम के गीत हम गाएं।
आपसी बैर को भूलें, अपनों से भी मिल आएं।
सभी त्योहार बतलाते, सदा प्रेम से रहना।
सभी घर के बुज़ुर्गों को, कभी मन से न बिसराएं।

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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