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Challenge shayari for shayar (शायर, कवि)

लिखने की हद….

हर पल जो दिल को छू जाये कोई ऐसा एहसास लिखो
ख़ामोशी भी ज़ुबान बन जाए कोई ऐसी बात लिखो

हर लम्हा एक पल ठहर जाये कोई ऐसा इत्तेफाक लिखो
लिखने की हर हद पार हो इस कदर दिन रात लिखो

जिस पर हो उस चाँद का साया, आसमान के उन तारो की बारात लिखो
जिसे पढ़कर आंसू भी ना थम पाए, किसी वक़्त के ऐसे हालात लिखो

पूरी ज़िन्दगी कुछ शब्दों में ही उतर जाए
उन शब्दों में कुछ ऐसा ख़ास लिखो

 

~ रंजना चौधरी

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कुछ जख़्म कभी नहीं भरते

कुछ लम्हे कभी नहीं गुज़रते
कुछ रातें कभी नहीं कटती

कुछ एहसास कभी नहीं मरते
कुछ दरारें कभी नहीं भरती

कुछ वादे कभी नहीं मुकरते
कुछ उम्रे कभी नहीं घटती

कुछ जख़्म कभी नहीं भरते
कुछ यादें कभी नहीं मिटती

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बादलों समय पर बरस जाना, जमीन जल चुकी है

किसानो की उम्मीद कविता

जमीन जल चुकी है आसमान बाकी है,
सूखे कुएँ तुम्हारा इम्तहान बाकी है..

वो जो खेतों की मेढ़ों पर उदास बैठे हैं,
उनकी आखों में अब तक ईमान बाकी है

बादलों बरस जाना समय पर इस बार
किसी का मकान गिरवी तो किसी का लगान बाकी है

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Beautiful Hindi Thoughts on Life | Satya Vachan

“जीत” किसके लिए ‘हार’ किसके लिए
‘ज़िंदगी भर’ ये ‘तकरार’ किसके लिए,
जो भी ‘आया’ है वो ‘जायेगा’ एक दिन
फिर ये इतना “अहंकार” किसके लिए !

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True Fact Shayari about Sita & Ravan

आदमी ही आदमी को छल रहा है,
ये क्रम आज से नही, बरसों से चल रहा है
रोज चौराहे पर होता है ” सीताहरण ”
जबकि मुद्दतों से ‘रावण’ जल रहा है…!!

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मैं अंदर ही अंदर भभक रहा हूँ

जलते बुझते दिये सा लग रहा हूँ
मैं अंदर ही अंदर भभक रहा हूँ

किसी और की ज़रूरत ही क्या मुझे अब
मैं ठहरा खुदगर्ज खुद ही खुद को ठग रहा हूँ

ये कैसी आग है जो जलती नहीं
बुझकर भी अश्क़ों के साये में सुलग रहा हूँ

शख्स था जो मुझमें जाने कहाँ चला गया
असल में भी अब तो नकल सा लग रहा हूँ।

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