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साफ कपड़े पहने दागदार लोग

हम शरीफ इतने हैं के खुली किताब बने बैठे है,
और वो चेहरे पे मुखौटा और झूठ का लिबास पहने हुए बैठे हैं,
और हमारी बेदागी को वो महफ़िल पर दाग कहते हैं।
महफ़िल में साफ कपड़े पहने दागदार लोग बैठे है,

 

~ Arun nogia

 

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माँ बाप के आशीर्वाद की चाह

पौधा अच्छे से उग नहीं सकता, बिना खाद
याद आता है मुझे आपके हाथो से खिलाए खाने का स्वाद,
निकल चुका हुआ जीवन के सफर पर होने आबाद
बस बची यही मेरी आखिरी मुराद
काश फिर से मिल पाता आपका आशीर्वाद।

 

~ Rahul verma (Rv)

 

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मै डरा नहीं हूँ

शज़र से टूट कर गिरा हूँ
मै ख़फ़ा हूँ, निराश हूँ, मगर मरा नहीं हूँ
मै डर तो दिखाया बहुत था,
पत्थर का हूँ मै डरा नहीं हूँ
सितम ये सारे दिल हसके सहेगा
जमाना जमात है बेशर्मो की, यूँ ही कहेगा

 

~ Kapil Beragi

 

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यह जीवन है क्षण भंगुर

जब जान लिया कि यह जीवन है क्षण भंगुर
फिर हे मनुष्य है तुझे किस बात का गुरूर
उठो! खंडित कर दो ऐसे विचार संकीर्ण
दिल के पिंजरे से कर दो मोहब्बत को विकीर्ण

 

~ Himanshi Nigam

 

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गांव का जीवन, गांव के नज़ारे

गांव के बाजारों में भी, खूब नज़ारे होते थे।
चाट पकौड़ी और बताशों के चटकारे होते थे।
नीम और बरगद की छाया में बैठा करते थे।
खुशियों के पल आपस में वारे न्यारे होते थे।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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मुश्किलें राह पर मिलती रहेंगीं

प्यार से रिश्ता निभाना चाहिए।
सोचकर के दिल लगाना चाहिए।
मुश्किलें राह पर मिलती रहेंगीं।
कर्म पथ पर चलते जाना चाहिए।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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