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कई आए इस जलती शमा को बुझाने

काले गरजते बादलों को धुआँ समझा हैं
मैंने आँधियों को भी हवा समझा हैं…

गिले शिकवे की मुराद हैं उन्हें हमसे
अब क्या बताए हमने दर्द को तो अपनी मेहबूबा समझा हैं

भरा दिल तोड़े कोई और वजह कोई
किसी को कितना कोसे अब हमने खुद को बेवफा समझा हैं

कई आए इस जलती शमा को बुझाने
यूँ ही बुझा जाए, क्या हलवा समझा हैं

 

~ Kshitij Muktikar

 

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ए खुदा तेरी रज़ा क्या है?

इन नसीहतों में मज़ा क्या है,
इन इनायतों में रखा क्या है,

जो मौलवी बने बैठे हैं यहाँ,
इनसे पूँछों इन्होंने करा क्या है।

भले आदमी का निशान क्या है,
असल नवाज़िश ए करम क्या है,

क्यों डरे भला क़यामत से इतना,
दर्द से निजात नहीं तो मौत क्या है,

इन तालिमों की वजह क्या है,
ए खुदा तेरी रज़ा क्या है,

हाँ मैं करता हूँ सवाल बोलो,
इन ग्रंथों में मेरी सज़ा क्या है।

~ Shubham Jain

 

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माँ बाप के लिए बच्चो को सीख

दो घड़ी के लिए

दो घड़ी के लिए, बैठ जाया करो।
मां बाप के पास भी कभी आया करो।

 

दो घड़ी के लिए……..।।

 

कभी उंगली पकड़कर, चलना सिखाया था।
कभी उनको भी बाहर घुमाया करो।

 

दो घड़ी के लिए…….।।

 

प्यार के दो बोल, अनमोल हैं।
प्यार से कभी तुम, मनाया करो।

 

दो घड़ी के लिए……..।।

 

माना तुम पढ़ लिखकर, इंसान हो गए।
कभी तो इंसानियत, दिखाया करो।

 

दो घड़ी के लिए……..।।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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प्रेरणादायक शायरी अनुभव पर

हर कोई उड़ सकता है यदि मनुष्य ठान ले।
जो किताबों में लिख़ा है, ठीक से उसे मान ले।
तमाम लोगों ने भी, हौंसलों से उड़ान भरी है।
जिंदगी के कारवाँ में, अनुभवों से सब जान ले।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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दिल को छूने वाली लाइन्स घर के बड़े और बुज़ुर्गों पर

बुज़ुर्गों की कीमत समझो, वे अमूल्य होते हैं।
अनुभव तमाम जीवन के, उनके करीब होते हैं।
माना कि आजकल लोग, इनको तवज्ज़ो नहीं देते।
पर जिनके साथ रहते हैं ये, वे बड़े ख़ुशनसीब होते हैं।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

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मेरी मजबूरी को समझो मैं गुनाहगार नहीं

मेरी मजबूरी को समझो मैं गुनाहगार नहीं हूँ।
मैं सच्चाई के साथ हूँ, झूठ का पैरोकार नहीं हूँ।
भले ही तुम मेरी, मजबूरियां ना समझो।
मैं तुम्हारा साथी हूँ कोई अपराधियों का यार नहीं हूँ।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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