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अब जीने में वो बचपन वाली बात नहीं

 

क्या हुआ जो अब तू मेरे साथ नहीं है,
वो पहले जैसा दिन और रात नहीं है,
तुझसे बिछडने का मलाल नहीं है मुझे,
बस अब जीने में वो बचपन वाली बात नहीं हैं।

 

– विक्रम

 

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गलियों में भटकने की जरुरत क्या है?

Lockdown Shayari for who is going outside

 

“बे वजह घर से निकलने की जरुरत क्या है”
मौत से आँखे मिलाने की जरुरत क्या है

 

सब को मालूम है बाहर की हवा है कातिल
यूँही कातिल से उलझने की जरुरत क्या है

 

ज़िन्दगी एक नेमत है उसे संभाल के रखो
कब्रगाहों को सजाने की जरुरत क्या है

 

दिल बहलाने के लिए घर में वजह है काफी
यूँही गलियों में भटकने की जरुरत क्या है”

 

#Lockdown
#Covid-19
#CoronaVirus
#IndiaFightsCorona

 

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Corona Virus Effects on Poor People Shayari by Ayushman

Ayushman Lockdown Corona Shayari

Ayushman Lockdown Corona Shayari

 

अब अमीर का हर दिन रविवार हो गया,
और गरीब है अपने सोमवार के इंतजार में,
अब अमीर का हर दिन से परिवार हो गया है,
और गरीब है अपने रोजगार के इंतजार में

– आयुष्मान खुराना

 

#covid-19

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Sad Corona Virus Shayari

 

ए इंसान मत खा तू इतनी दरिंदगी से किसी जीव को
रख इंसानियत कुछ तो, वो भी किसी का बच्चा होगा
खुदा की जब आएगी बारी तुझे सजा देने की
क्या जवाब तेरे पास उस खुदा को देने का होगा

 

#saveanimals
#bevegetarian
#livelonglife
#dnteatnonveg
#Byenonveg

 

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मौका, वक़्त और जिंदगी

मौका वक़्त का मोहताज नही होता
क्योंकि मौका कभी वक़्त देखकर नही आता।
इसलिए वक़्त के लिए मौके को छोड़ना सबसे बड़ी बेवकूफी होती है।
वक़्त इंसान का रुख बदल सकता है लेकिन मौका, उसकी जिंदगी।

 

~ Sonalika Singh

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नागरिकता संशोधन बिल पर शायरी

सभी का खून शामिल था इस मिट्टी में,
हम अनजान थोड़े है,
किन्तु जिनके अब्बा पाकिस्तान ले चुके,
अब उनका हिंदुस्तान थोडे है।

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