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ये है ज़िन्दगी

ज़िन्दगी ….!!!!!

यहां खुशियों का दरबार भी है,
और दुःख का इज़हार भी….!

यहां मुस्कराहट का मौका भी है,
और आंसुओं की वजह भी….!

यहां दिलों में जन्नत है,
पर वक़्त के दरमियान जहन्नम भी….!!!

यहां मुस्कराहट का मौका भी है,
और आंसुओं की वजह भी….!

ये है बड़ी प्यारी,
पर लोगों के नज़र की मोहताज भी….!

की जिसके नज़रों को खूबसूरत लगे,
उसके लिए जन्नत भी, मुस्कुराने की वजह भी…!

और जिसके नज़रों को बेदर्द लगे,
उसके लिए जहन्नुम भी, आंसुओं की वजह भी…!

ये है ज़िन्दगी…….

 

~ अलीशा अहमद

 

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प्यार के गीत गाते रहो | जोश और उमंग से भरी कविता

प्यार के गीत गाते रहो
तुम सदा यूं ही मुस्कुराते रहो।

ज़िंदगी की बड़ी है कठिन डगर,
ख़ुशियों के गीत सदा गुनगुनाते रहो।

हंसते-हंसते ये रास्ता कट जाएगा,
गम का बादल सदा यूं ही छंट जाएगा।

प्रेम की डोर यूं ही पकड़ कर चलो,
कुछ ना कुछ बोझ जीवन का बंट जाएगा।

उदासी न हो ना ही अफ़सोस हो,
मन में यूं ही हमारे नया जोश हो।

प्रीत पलती रहे ज़िंदगी में सदा,
मन में अपने न कोई आक्रोश हो।

प्यार के गीत गाते रहो………….।।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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ख्वाहिशों की उम्मीद में फिर से जीना सीख गई

 

ख्वाहिशे आज फिर मुझसे रूठ गई
तनहा रातों में आज फिर आंसु बनकर बह गई

कुछ था जो वो मेरे कानों में आकर कह गई
की ये तो वक्त की कुछ साजिशें थी, जिसमें तु फिर से उलझ गई

वो क्या रूठी मुझे लगा मेरी जिंदगी ही रूठ गई
पर फिर उस सुलगती शाम में फिर अनगिनत ख्वाहिशें बुन गई

जब ख्वाहिशें मुझ से रूठी तो उस से घायल तो जरूर हुई
पर उसी ख्वाहिशों की उम्मीद में फिर से जीना भी सीख गई।

 

~ Rinku patel

 

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दुनिया का इतिहास पूछता

दुनिया का इतिहास पूछता,
रोम कहाँ, यूनान कहाँ?
घर-घर में शुभ अग्नि जलाता।
वह उन्नत ईरान कहाँ है?

दीप बुझे पश्चिमी गगन के,
व्याप्त हुआ बर्बर अंधियारा,
किन्तु चीर कर तम की छाती,
चमका हिन्दुस्तान हमारा।

शत-शत आघातों को सहकर,
जीवित हिन्दुस्तान हमारा।
जग के मस्तक पर रोली सा,
शोभित हिन्दुस्तान हमारा।

 

~ अटल बिहारी जी वाजपेयी

 

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मुझे फिर से एक बार मरना होगा

तुझे फिर से प्यार करना होगा,
तेरा फिर से ऐतबार करना होगा।

तेरे साथ जीने की आरज़ू में,
मुझे फिर से एक बार मरना होगा।

सरे आम मिली थी जो जिल्लत तुझसे,
मुझसे भूले नहीं भूली जाती।

सब भूल कर आगे बढ़ना होगा,
मुझे फिर से एक बार मरना होगा।

तेरा हर इल्ज़ाम मेरे दिल पर एक ज़ख्म है,
तेरे दिल में मेरे लिए नफरत ज़्यादा प्यार कम है।

आज हर उस ज़ख्म को भरना होगा,
मुझे फिर से एक बार मरना होगा।

मेरे आंसुओं में मेरी सच्चाई थी,
फिर मैंने तेरी कसम भी तो खायी थी।

तुझे ऐतबार मेरा आज करना होगा, वरना…
मुझे फिर से एक बार मरना होगा।
मुझे फिर से एक बार मरना होगा।।

 

~ निशा अरोड़ा (हिना)

 

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कर्मपथ अभी शुरू हुआ है,

कर्मपथ अभी शुरू हुआ है,
मंजिले अभी दुर है।
मेरे अटल निश्चय के आगे,
नभ-पर्वत चूर है।

अनेक बार हारा तो क्या,
अनेक ठोकर खाई तो क्या,

ठोकर के आगे का पथ,
ले जाऐगा बुलंदि पर।
चल कर्मपथिक तू चलता बन
सफलता की राह पर॥

 

~ Jitendra s.ameta

 

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एहसास से भरी प्यार पर कविता

 

वो एहसास, मुझे अच्छा लगता है

 

बेखयाली के लम्हों में,
यूँ ही तेरा खयाल आया जाने का
वो एहसास, मुझे अच्छा लगता है।

 

घिर जाऊं जो सावन की घटाओं से,
काश तेरे साथ होने का
वो एहसास, मुझे अच्छा लगता है।

 

नींद ना आये जब रातों में,
तो तेरी तस्वीर देखकर मुस्कुराने का
वो एहसास, मुझे अच्छा लगता है।

 

गर अधूरा से महसूस हो खुदमे,
तो तेरी दोस्ती निभाने का
वो एहसास, मुझे अच्छा लगता है।

 

गर रूठ जाऊं मैं कभी हालातों से,
तो तेरा मुझे कसकर गले लगाने का
वो एहसास, मुझे अच्छा लगता है।

 

रहते तो बहुत दूर हो हमसे,
पर पास ना होकर भी पास होने का
वो एहसास, मुझे अच्छा लगता है।।

 

~ शायरों की टपरी

 

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मैंने कोरोना का रोना देखा है

Corona ka Rona Sad But True Poem

 

मैंने कोरोना का रोना देखा है!
और उम्मीदों का खोना देखा है!!

 

लाचार मजदूरों को रोते देखा है!
गिरते पड़ते चलते और सोते देखा है!

 

पिता को सूनी आंखों से तड़पते देखा है!!
तो मां की गोद में बच्चे को मरते देखा है!

 

गरीबों का खुलेआम रोष देखा है!!
तो मध्यमवर्ग का मौन आक्रोश देखा है!

 

पीएम केयर के लिए भीख की शैली देखी है!
तो उसी पैसे से वर्चुअल रैली देखी है!!

 

गरीबों को अस्पतालों में लुटते देखा है! !
तो निर्दोषों को बेवजह पिटते देखा है!

 

अल्लाह भगवान की दुकानों का बंद भी होना देखा है!
तो रोना रोती सरकारों का अंत भी होना देखा है!!

~ Dr. Anita

 

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1990 wala pyar | 90’s Love Shayari Poem

1990 Love 90's Shayari Poems

 

अपना इश्क़ 1990 वाला चाहता हूँ,

 

टेक्स्ट, कॉल से दूर,
ख़तों पर रहना चाहता हूँ,

 

ये बाबू शोना छोड़के,
उसे प्रेमिका कहना चाहता हूँ,

 

जब मिले हम अचानक से,
तो उसकी खुशी देखना चाहता हूँ ,

 

जब आये सुखाने कपड़े छत पर,
तो चोरी चोरी मिलना चाहता हूँ,

 

जो पापा और भाई के आने से डरती हो,
ऐसी मेहबूबा चाहता हूँ,

 

हॉं, मैं आज भी मोहब्बत
पुराने जमाने वाली चाहता हूँ ।

 

~ नितिन राजपूत

 

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CORONA-E-DARD

CORONA-E-DARD

 

Ye jo dard hai bada bedard hai
Sahar bhar ke dard ka dukandaar hai

 

Na guzarti hai ab ye bechain raate,
Sahar-e-azaab me rota ye dil hain

 

Ye kaisi khamoshi kohra sa chaya hai,
Kiski aib me aaj lab sabke sile hai,

 

Ye bhigi aankhe ye laasho ke bistar,
In saazisho ke piche wo lambi deewar hai

 

Ab na saha jata ye apno se bichadna,
Ae khuda ab ek tera hi sahara hai

 

Bheegi aankho me fir wo hansi lauta de kyuki,
Ess dard ka ye RAG bhi ek khariddar hai

 

~ RUDRA GOSWAMI (RAG)

 

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