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क्या प्यार में सोचा था, क्या प्यार में पाया हैं

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क्या प्यार में सोचा था, क्या प्यार में पाया हैं,
तुझको मिलाने की चाहत में, खुद को मिटाया हैं,
इस पर भी कोई इलज़ाम, ना तुझ पर लगाया हैं
मेरी ही ख्वाईशो ने, आज मुझे अर्थी पर सुलाया हैं

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अब दिल को दर्द भी नहीं होता

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निकल पड़ा हूँ उस रास्ते पे
जो कभी ख़त्म नहीं होता

रुक जाता उस वक़्त अगर तूने
….एक बार भी रोका होता

आते हैं आज भी वो सपने
जब कभी गलती से, मैं सोता

बनाता हूँ ख़यालो में चेहरा तेरा
की दिल से अक्स तेरा नहीं होता

चाहता हूँ की रोकर गम भुला दू
पर कम्बक्त दिल ही नहीं होता

बहुत खायी हैं इस दिल ने चोटें
की अब दिल को दर्द भी नहीं होता

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एक बेवफा से प्यार किया, ज़िन्दगी बर्बाद

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खुले आसमान के निचे बैठा हूँ …कभी तो बरसात होगी …..
एक बेवफा से प्यार किया हैं तो ज़िन्दगी कभी तो बर्बाद होगी

~ रोबिन श्रीवास

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दर्द-ए-दिल की दास्तान, फिर भी वाह-वाह

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यह ग़ज़लों की दुनिया भी अजीब है;
यहाँ आँसुओं का भी जाम बनाया जाता है;
कह भी देते हैं अगर दर्द-ए-दिल की दास्तान;
फिर भी वाह-वाह ही पुकारा जाता है।

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Very very very sad dard shayari on pyar & zindagi

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जाने क्यूँ आजकल, तुम्हारी कमी अखरती है बहुत
यादों के बन्द कमरे में, ज़िन्दगी सिसकती है बहुत

पनपने नहीं देता कभी, बेदर्द सी उस ख़्वाहिश को
महसूस तुम्हें जो करने की, कोशिश करती है बहुत

दावे करती हैं ज़िन्दगी, जो हर दिन तुझे भुलाने के
किसी न किसी बहाने से, याद तुझे करती है बहुत

आहट से भी चौंक जाए, मुस्कराने से ही कतराए
मालूम नहीं क्यों ज़िन्दगी, जीने से डरती है बहुत।

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वक़्त से मजबूर, हालात से लाचार दर्द शायरी

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वक़्त से मजबूर दर्द शायरी

 

ज़िन्दगी के उलझे सवालो के जवाब ढूंढता हु
कर सके जो दर्द कम, वोह नशा ढूंढता हु
वक़्त से मजबूर, हालात से लाचार हु मैं
जो देदे जीने का बहाना ऐसी राह ढूंढता हु

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