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एक अजनबी के घर में गुजारी है जिंदगी

एक अजनबी के घर में गुजारी है जिंदगी |
लगता है जैसे सफर में गुजारी है जिंदगी |
ये और बात है कि मैं तुझसे दूर हूँ,
लेकिन तेरे अशर में गुजारी है जिंदगी |

 

~ अब्दुल रहमान अंसारी (रहमान काका)

 

 

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