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Kuch to andar se toot raha hai

जीने की चाह में, जीवन छूट रहा है
कुछ तो हैं, जो अंदर से टूट रहा हैं
हसरते कब उठी, कब शांत हो गयी
ज़िन्दगी गुल से, कब बेजान हो गयी
ऐसा नहीं की, खिलने की चाह नहीं, पर
कुछ तो है जो अंदर से टूट रहा हैं
जीने की चाहत में, जीवन छूट रहा है

 

~ मोहिनी

 


 

Jeene ki chah mein, jeevan chhut raha hai
Kuch toh hain, Jo andar se toot raha hai
Hasrate kab uthi, kab shaant ho gayi
Zindagi gul se, kab bejaan ho gayi
Aisa nahi ki, khilne ki chah nahi Par,
Kuch to hai Jo andar se toot raha hai
Jeene ki chahat me, jivan chhut raha hai

 

~ Mohini

 

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चुप रहने की कीमत | Deep Sad Lines

सपने तो बहुत अच्छे अच्छे दिखे हैं
पर ना जाने हक़ीक़त क्या होगी
चुप रहने की कीमत तो चुकाली
अब अगर बोल दू तो कीमत क्या होगी

~ अर्शी

 


Sapne to bahut acche acche dikhe h
Par naa jaane haqiqat kya hogi
Chup rehne ki keemat to chukali
Ab agr bol du to keemat kya hogi

~ Arshi

 

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कुछ सवाल एक आशिक़ से उसके इश्क़ की इन्तहा जानने के लिए

तोड़ दूं अगर मैं रिश्ते की डोर, तो जोड़ पाओगे क्या ??
छोड़ दूं अगर मैं साथ तुम्हारा हाथ, मेरा फिर भी थामोगे क्या ??

खून के आंसूं रुलाती रहूं अगर मैं, इसके बावजूद भी मेरे आंसू पोछोगे क्या ??
किसी और को चाहने लगूं अगर मैं, तुम फिर भी मुझे ही चाहोगे क्या ??

ख़्वाबों में न दिखूं अगर मैं तुम्हें, तो नींद के कातिल बनोगे क्या ??
बेइलाज हो जाए अगर बीमारी मेरी, तुम दुआएं लेकर अंगारों पे चलोगे क्या ??

बड़े चुप – चुप से लगते हो, अब आंखों को जलाओगे क्या ??
अधमरी पड़ी हैं अगर बातें हमारी, तुम आशा की लॉ बुझा पाओगे क्या ??

ओढ़ लूं मैं अगर सफ़ेद चादर, मेरी कब्र सजा पाओगे क्या ??
तारा बन अगर टूट जाऊं मैं किसी और को, अपनी क़िस्मत में मांगोगे क्या ??

 

– गरीमा त्यागी

 

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वक्त वो दोस्त है जो

वक्त वो दोस्त है जो सिखाता रहा। हंसाता रहा और रुलाता रहा।
ठोकरें खाकर ही चलना सीखा है। वक्त ही नयी राह दिखाता रहा।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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खुशियां बेशुमार लेके आये नया साल

खुशियां बेशुमार लेके आये नया साल,
अपनों का खूब प्यार लेके आये नया साल

ज़मीन से आसमान तक मोहब्बत की गूँज हो,
मेहबूब का दीदार भी करवाए नया साल,

आये ना किसी की आँख में आंसूं ए खुदा,
उम्मीद की फुहार यूँ बरसाए नया साल,

अमन-ओ-चैन की सिर्फ बारिश हो हर जगह,
कोई ज़ख्म ना तलवार लेके आये नया साल

बीते बरस की तकलीफें भूल जाएँ सब,
ख़्वाब सारे पुरे हो ऐसा आये नया साल

नए साल 2021 की तहे दिल से शुभकामनाएं

 

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खुशियों का चांद, अब खिलता नहीं

उड़ा जाता है चांद, छोर मिलता नहीं।
खुशियों का चांद, अब खिलता नहीं।
चांद का रंग रूप, कुछ अलग ढ़ंग का।
अब चांदनी से चांद, कहीं मिलता नहीं।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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