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यूँ तेरा मेरा साथ हो

यूँ तेरा मेरा साथ हो
बनारस का गंगा घाट हो
शाम के हसीन नज़ारे हो
चाँद भी साथ हमारे हो
प्रकृति की हवा सुहानी हो
पक्षियों की मधुर वाणी हो
तेरी मेरी अनकही कहानी हो
हाथों में निर्मल गंगा पानी हो
कुछ वादें तेरी जुबानी हो
कुछ कसमे मेरी जुबानी हो
घाटों पर रात का सन्नाटा हो
गंगा के लहरो की गूंज हो
वहाँ हम एक ज्योतिपुन्ज हो
ऐसी ही प्रेममयी हमारी कहानी हो
गंगा स्वयं साक्ष्य जिसकी निशानी हो

 

~ Pratiksha rai

 

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ए-दिल फिर उसे तलाश ना कर

ए-दिल यूँ खुद को खुद की नजरो में रूसवा ना कर
यूँ बेवफा के आने का इंतज़ार ना कर
हम तड़पते हैं तेरी हरकतों से……
ए-दिल फिर उसे मोबाइल पर तलाश ना कर

 

~ unknown

 

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अभी तो कहानी शुरू ही हुई थी

उसने कहा हमसे के वो अब और रुक नही सकते,
मेने भी मासूमियत से पूछ लिया जाना जरूरी है क्या?
अभी तो कहानी शुरू ही हुई थी हमारी,
तुम्हारे हिसाब से तुम्हे लगती ये पूरी है क्या….

 

~ Pari

 

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यहां हर एक का बदला हुआ रंग देखा

इश्क, दोस्ती, मतलब देखा…
इस जमाने मे हमने बहुत कुछ देखा…

लोग देखे लोगों का ढंग देखा…
यहां हर एक का बदला हुआ रंग देखा…

कही घाव, कही मरहम, कही दर्द देखा…
यहां अपनों के हाथ मे खंजर देखा…

कभी रात, कभी दिन देखा…
कही पत्थर का दिल, तो कही दिल पर पत्थर देखा…

कभी हकीकत, कभी बदलाव देखा…
यहां हर चेहरे पर दोहरा नकाब देखा…

चाहत, जिस्म, फिर धोखा देखा…
यहां मोहब्बत के नाम पर सिर्फ मौका देखा…

जीते-जी बस यही देखना बाकी था, अंश…
एक उसे भी, किसी और का होते देखा…

~ अंश

 

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अश्क बहाने छोड़ दिए मैंने | Very Deep Lines

अब अश्क बहाने छोड़ दिए मैंने,
मसला ये नहीं के अब गम नहीं है।
बात तो ये है करने शिकवे छोड़ दिए मैंने…

दिल दुखता था जिन रिश्तों से,
सब नाते रिश्ते तोड़ दिए मैंने…

राज़ी होना सिख लिया है उस खुदा की मर्जी में,
ना हासिल रिश्ते तलाशने छोड़ दिए मैंने..

सुकून ढूंढ लेती हू अब रातों की गहराइयों में
दिन की चकाचौंध में रिश्ते बुनने छोड़ दिए मैंने।।

 

~ Pari

 

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पाना भी नही चाहता और खोने से भी डरता है

वफ़ा भी नही करता वो बेवफ़ा होने से भी डरता हैं
मुझे पाना भी नही चाहता और मुझे खोने से भी डरता है

 

~ Pari

 

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ख़ुद ही रूठ कर ख़ुद ही मान जाना इतना आसान नहीं

गुस्से पर काबू पाना इतना आसान नहीं होता
अपनो को भूल जाना इतना आसान नही होता
दिल हमारा भी नहीं लगता बगैर अपनो के पर
ख़ुद ही रूठ कर ख़ुद ही मान जाना इतना आसान नहीं होता

 

~ Sneha kumari singh

 

 

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