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जीतने के लिए मेहनत करनी पड़ती है

जीतने के लिए मेहनत करनी पड़ती है
सिर्फ बातो से बात कभी बनती नही

कुछ पाने के लिए रातों को जागना पड़ता है
यूं दिन में सोने से दाल कभी गलती नही

सोच विचार से अगर सब मिल जाता तो
दिल में कुछ पाने की आग कभी जलती नही

 

~ Pari

 

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मेरी ख्वाइश कुछ ऐसी हो

मैं खुद ही खुद को बयां करती हूं, अजीब सी लड़की हूं जाने क्या-क्या ही चाहती हूं,
छोटी – छोटी आंखों में सपने हजार देख के मुसाफिर बनना चाहती हूं,

है रस्ते अनजान फिर भी बेफ्रिक होकर मंजिल ढूंढना चाहती हूं
खोने का डर नहीं बस सपने पूरा करना चाहतीं हूं

दे साथ गर कोई जिंदगीभर शुक्रगुजार होना चाहती हूं
यूंह तो ख्वाइशें हर दिन बदलती रहती हैं

पर मेरी ख्वाइश कुछ ऐसी हो की बस उसी में खोकर रहना चाहती हूं…
मैं खुद को बस खुद ही से बयान करना चाहती हूं।

~ Dr.Ruchika Mehta

 

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सूरज की रौशनी फीकी पड़ जाए ऐसी चांदनी रात होनी चाहिए

सूरज की रौशनी फीकी पड़ जाए
ऐसी भी कोई चांदनी रात होनी चाहिए

आँखों में गुम हो जाऊ तुम्हारी,
ऐसी भी कोई बात होनी चाहिए

पीठ पीछे तो सब बोलते है मेरी जान
जो सामने बोलके दिखाए वो औकात होनी चाहिए

झुकता नहीं सर यूँही किसी डर के आगे
हर सर झुक जाये उस डर में वो बात होनी चाहिए

 

~ Pari

 

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तू दर्द हैं या मलहम

ख़्वाबों की एक लहर उठी, डूबा जिसमे तन और मन
थम सा गया वक़्त और रुक से गए हम

ना जाने जिस असमंजस में, उलझ चूका हैं ये बावला दिल
पता नहीं चलता, तू दर्द हैं या मलहम

काश ना आते तुम, ज़िन्दगी में ख़ुशी की बहार लेकर
काश ना जाते तुम, दिल पर ये गहरा घाव देकर

काश ना मिलते कभी, हो जाते कही गुम
हर शाम हैं रूठी, हर दिन हैं अधूरा

ना जाने जिस असमंजस में, उलझ चूका हैं ये बावला दिल
पता नहीं चलता, तू दर्द हैं या मलहम

 

~ Sanobar

 

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इन खुशियों को मेरी ही नजर ना लग जाये

तेरी एक मुस्कराहट से ये पूरी दुनिया सज जाए,
तू जब बोले तो मेरे कानो में शहनाई बज जाए |
जब से तू आयी है मेरी जिन्दगी में,
कसम से आईना भी देखने से डरता हू कि
कहीं इन खुशियों को मेरी ही नजर ना लग जाये

 

~ Tanishq Agrawal

 

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Mohabbat aur Gurur

हे मोहब्बत तुझे किस बात पे गुरुर है,
तेरा साथ जो ना मिले तो तू किसे मंजूर है,
लोग तुझे बदनाम करते है,
और तू सोचती है की, ये मेरा कसूर है !!

 

~ राहुल मेहता

 

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कैद है मेरा प्यार इन दीवारो के पीछे

पहले इश्क़ करने को जमाना चाहिये था,
तुम मिली तो सब पुराना चाहिये था।
कैद है मेरा प्यार इन दीवारो के पीछे,
रिहा करने को दोस्तना चाहिये था।
मिल्कियत बनायी है मेहनत से मैने,
एक घर खड़ा करने को तुम्हे ज़माना चाहिये था।
सुना है काफी दिन से चुप हूँ मै,
मुहँ खुल्वाने को तुम्हे हँसाना चाहिये था।
लफ्ज़ कम नही होती इश्क़ मे कभी भी,
तुम्हे बस एक बार बताना चाहिये था।
महफ़ूज रहा हर आँसु पलको पर,
अब रोने को बस एक अफसाना चाहिये था।

 

– प्रखर तिवारी

 

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