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राज मत पूछो उन्हें क्यों चाहता है दिल

राज मत पूछो उन्हें क्यों चाहता है दिल,
गर बता देंगे हकीकत आप भी जाओगे हिल।
इसलिए होंठो को हमने अब दिया है सिल,
ताकि भरते घाव कोई फिर न पाये छिल।

 

~ डॉ सतीश चन्द्र पाण्डेय

 

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खुद रो कर भी सभी को हंसा कर आया हूँ

खुद रो कर भी सभी को हंसा कर आया हूँ
मैं अपने दिल के दर्द को शायरी में सुना कर आया हूँ
और मुझे पाने की चाहत वो ही नहीं रखती
जिसके लिए मैं महफिलों को ठुकराकर आया हूँ

 

~ हरमीत सिंह

 

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अब तो मन भी रेगिस्तान जैसा

दिन कटता नहीं अब रात नहीं होती, तेरी मेरी कोई मुलाकात नहीं होती।
अब तो मन भी रेगिस्तान जैसा है, खुशियों की अब बरसात नहीं होती।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘बरसाने’

 

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वक्त भी बड़ी अजीब चीज़ है

ये वक्त भी बड़ी अजीब चीज़ है,
“एक पल खरीदने के लिए ना जाने खुद को कितनी बार बेचना पड़ता हैं,
और जब खरीददार नहीं मिलते, तो लोग निकम्मा समझने लगते है।”

 

~ अदिति अग्रवाल

 

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ज़िंदगी तो चार दिन की

फूलों की तरह हमें सदा खिलना चाहिए,
प्रेमभाव से हमेशा हमें मिलना चाहिए।
ज़िंदगी तो चार दिन की जी भर जिएं,
निःस्वार्थ भाव से परमार्थ करना चाहिए।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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ज़िंदगी का सार हो तुम मां

गुलाब की तरह हो तुम मां! मेरे मन मंदिर में महकती हो।
ज़िंदगी का सार हो तुम मां! तुम्हीं दिल से मुझे समझती हो।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘बरसाने’

 

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गिराया जिसे अपनों ने

गिराया जिसे अपनों ने वो उठकर फिर क्या करता
परायों से जो लड़ा नहीं वो अपनों से क्या लड़ता

~ अतुल शर्मा

 


 

Giraya jise apno ne Wo uthkar fir kya karta
Parayo se jo lada nahi Wo Apno se kya ladta

~ Atul Sharma

 

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