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मुश्किलें राह पर मिलती रहेंगीं

प्यार से रिश्ता निभाना चाहिए।
सोचकर के दिल लगाना चाहिए।
मुश्किलें राह पर मिलती रहेंगीं।
कर्म पथ पर चलते जाना चाहिए।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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अब इश्क़ मिटाया जाएँ

अब कुछ बातें छुपाई जाएँ तो ठीक होगा
ये दूरियां बढ़ायी जाएँ तो ठीक होगा

पास रहने के वादें सारे टूट चुके हैं
कशमें दूर रहने की खायी जाएँ तो ठीक होगा

यूँ कब तक बस मजबूर होते रहेंगे
एक दूसरे के हाथों चूर होते रहेंगे

लोगो की बातें अब ज्यादा समाज आने लगी हैं
ये पलके नमी दिखाने लगी हैं

अपने हक़ में कुछ ना कहा जाएँ तो ठीक होगा
अब इश्क़ मिटाया जाएँ तो ठीक होगा

 

~ गुरुदेव सिंह

 

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यूँ तेरा मेरा साथ हो

यूँ तेरा मेरा साथ हो
बनारस का गंगा घाट हो
शाम के हसीन नज़ारे हो
चाँद भी साथ हमारे हो
प्रकृति की हवा सुहानी हो
पक्षियों की मधुर वाणी हो
तेरी मेरी अनकही कहानी हो
हाथों में निर्मल गंगा पानी हो
कुछ वादें तेरी जुबानी हो
कुछ कसमे मेरी जुबानी हो
घाटों पर रात का सन्नाटा हो
गंगा के लहरो की गूंज हो
वहाँ हम एक ज्योतिपुन्ज हो
ऐसी ही प्रेममयी हमारी कहानी हो
गंगा स्वयं साक्ष्य जिसकी निशानी हो

 

~ Pratiksha rai

 

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ए-दिल फिर उसे तलाश ना कर

ए-दिल यूँ खुद को खुद की नजरो में रूसवा ना कर
यूँ बेवफा के आने का इंतज़ार ना कर
हम तड़पते हैं तेरी हरकतों से……
ए-दिल फिर उसे मोबाइल पर तलाश ना कर

 

~ unknown

 

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अभी तो कहानी शुरू ही हुई थी

उसने कहा हमसे के वो अब और रुक नही सकते,
मेने भी मासूमियत से पूछ लिया जाना जरूरी है क्या?
अभी तो कहानी शुरू ही हुई थी हमारी,
तुम्हारे हिसाब से तुम्हे लगती ये पूरी है क्या….

 

~ Pari

 

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यहां हर एक का बदला हुआ रंग देखा

इश्क, दोस्ती, मतलब देखा…
इस जमाने मे हमने बहुत कुछ देखा…

लोग देखे लोगों का ढंग देखा…
यहां हर एक का बदला हुआ रंग देखा…

कही घाव, कही मरहम, कही दर्द देखा…
यहां अपनों के हाथ मे खंजर देखा…

कभी रात, कभी दिन देखा…
कही पत्थर का दिल, तो कही दिल पर पत्थर देखा…

कभी हकीकत, कभी बदलाव देखा…
यहां हर चेहरे पर दोहरा नकाब देखा…

चाहत, जिस्म, फिर धोखा देखा…
यहां मोहब्बत के नाम पर सिर्फ मौका देखा…

जीते-जी बस यही देखना बाकी था, अंश…
एक उसे भी, किसी और का होते देखा…

~ अंश

 

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