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तेरा मुस्कराना गज़ब ढा गया

तुम्हारी बातों में दिल आ गया था।
नज़र जब मिली थी मैं शर्मा गया था।
अदाओं ने तेरी, दिल मेरा छीना।
तेरा मुस्कराना गज़ब ढा गया था।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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बीच दरिया मे डूबे तो मर जायेंगे

उनकी नज़रो में हम अगर जो गिर जायेंगे,
कुछ नही दोस्तो हम बिखर जायेंगे।
टूटी कस्ती से दरिया ना पार हुए,
बीच दरिया मे डूबे तो मर जायेंगे।

 

– अमित वर्मा

 

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Kuch to andar se toot raha hai

जीने की चाह में, जीवन छूट रहा है
कुछ तो हैं, जो अंदर से टूट रहा हैं
हसरते कब उठी, कब शांत हो गयी
ज़िन्दगी गुल से, कब बेजान हो गयी
ऐसा नहीं की, खिलने की चाह नहीं, पर
कुछ तो है जो अंदर से टूट रहा हैं
जीने की चाहत में, जीवन छूट रहा है

 

~ मोहिनी

 


 

Jeene ki chah mein, jeevan chhut raha hai
Kuch toh hain, Jo andar se toot raha hai
Hasrate kab uthi, kab shaant ho gayi
Zindagi gul se, kab bejaan ho gayi
Aisa nahi ki, khilne ki chah nahi Par,
Kuch to hai Jo andar se toot raha hai
Jeene ki chahat me, jivan chhut raha hai

 

~ Mohini

 

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