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कवि तो कवि होते है, Shayari about Kavi

Shayari Poem on Poet, Kavi, Writer

 

कवि तो कवि होते है ।
ये ऐसे बुद्ध जिवी होते है
प्रखर इनकी रचनाओं में शब्दों से रवि होते है।
हैदराबादी, उर्दू, या हिंदी, ये लखनवी होते है ।

 

व्यंग, कविताएं, तंज कसने में,
ये बड़े अनुभवी होते है ।
कागज़ वस्त्र इनके, कलम आभूषण
समाज में साक्षरता की छवि होते है।

 

मै कवि नहीं, और क्या लिखूं ,
कबीर, तुलसीदास, बच्चन, निराला,
संसार में कभी कभी होते है।
कवि तो कवि होते है ।।

 

~ Abhidat Arunkumar Fale

 

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कहर कोरोना, विनती मेरे मालिक तुम मेहर करो ना

 

 

हे ईश्वर आन पड़ा है कहर कोरोना
विनती मेरे मालिक तुम मेहर करोना

 

भूल गए थे हम हस्ती तुम्हारी
मालिक संभाल ले अब कश्ती हमारी
अपने बच्चों को अब और सीख मत दो ना
विनती मेरे मालिक तुम मेहर करोना

 

प्रकृति की वेदना हम क्यों ना सुन पाए
आज अपनों की चीखे हमें यह बताएं
बहुत बड़ा ऋण प्रकृति का है चुकाना
विनती मेरे मालिक तुम मेहर करोना

 

रूह कांप जाती है आज ऐसी घड़ी है
फिर भी तेरी रहमत की आशा सबसे बड़ी है
ऐ विधाता विधि का यह लेख बदल दो ना
विनती मेरे मालिक तुम मेहर करोना

 

मोल क्या है अपनों का आज तूने सिखाया
घर बंद कर दिल के दरवाजों को खुलवाया
मकसद तेरा था हम सोते हुए को जगाना
विनती मेरे मालिक तुम मेहर करोना

 

आज हिंदू मुस्लिम सिख हो या इसाई
सबकी आंखें करुणा से हैं भर आई
कितना मुश्किल है अपनों से दूर जाना
विनती मेरे मालिक तुम मेहर करोना

 

नतमस्तक हम देश के उन रख वालों के
खुद को भूल जो लगे हैं लड़ने महामारी से
इनके नाम जले दियो को मत बुझाना
विनती मेरे मालिक तुम मेहर करोना

 

गाते पंछी, निर्मल नदिया वायु बिन जहर
बरसों के बाद आज देखी ऐसी सहर
साफ खुला आसमाँ कहे अब तो समझोना
विनती मेरे मालिक तुम मेहर करोना

 

मानते हम हुई भूल हमसे बड़ी है
माफ बच्चों को करना जिम्मेदारी तेरी है
हाथ जोड़े इन बेबस बच्चों को क्षमा दो ना
विनती मेरे मालिक तुम महर करोना

 

हे ईश्वर आन पड़ा है कहर कोरोना
विनती मेरे मालिक तुम मेहर करो ना

 

CA CS Nisha Patel

 


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वह मुस्कान ही क्या जिसमें खुशी ना हो।

Sad True Shayari on Muskan

Sad True Shayari on Muskan

 

वह नयन ही क्या जिसमें सपने ना हो,
वह चयन ही क्या जो अपने ना हो ।

 

वह फूल ही क्या जिसमें खुशबू ना हो,
वह शूल ही क्या जो चुभती ना हो।

 

वह दर्द ही क्या जो याद ना हो,
वह मुस्कान ही क्या जिसमें खुशी ना हो।

 

~ उत्तीर्णा धर

 

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