0

तुम मेरी सरगम बनो और मैं संगीत

तुम मेरी लय बनो और मैं तेरा गीत बनूं ,
तुम मेरी प्रीत बनो और मैं तेरा मीत बनूं ।
दुख की बरसात हो या खुशियों की बेला,
तुम मेरी सरगम बनो और मैं संगीत बनूं।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

Share This
0

Pyar Ke Effects Shayari

जब रंग मोहब्बत का चढ़ता है,
तो ख्वाहिशे शौकीन हो जाती है।
वादियां हँसीन और फिज़ाये संगीन हो जाती है,
दिल में चेहरा सिर्फ दिलबर का होता है ,
और सारी दुनिया रंगीन हो जाती है।
इश्क़ में मेहबूबा के दीवाने इस कदर मगरूर हो जाते है,
दुनिया के लिए अज़िब और आशिकी में अज़िज़ बनकर,
सारी दुनिया में मशहूर हो जाते है।

 

-आयुष्मान पांडेय

 

Share This
0

झूठी शानोशौकत और दिखावा करने वालो पर 4 पंक्तिया

कभी कभी आदमी इतराता बहुत है,
होता कुछ नहीं पर दिखाता बहुत है।
झूठी शानोशौकत में जीना चाहता है,
भेद खुल जाने पर वह शर्माता बहुत है।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

Share This
1

ज़िंदगी जीने का नया ढ़ंग होना चाहिए

ज़िंदगी में रंग और उमंग होना चाहिए,
एक सच्चा हमसफर भी संग होना चाहिए
माता पिता, गुरुओं का आशीष बना रहे,
ज़िंदगी जीने का नया ढ़ंग होना चाहिए।

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

Share This
0

कई आए इस जलती शमा को बुझाने

काले गरजते बादलों को धुआँ समझा हैं
मैंने आँधियों को भी हवा समझा हैं…

गिले शिकवे की मुराद हैं उन्हें हमसे
अब क्या बताए हमने दर्द को तो अपनी मेहबूबा समझा हैं

भरा दिल तोड़े कोई और वजह कोई
किसी को कितना कोसे अब हमने खुद को बेवफा समझा हैं

कई आए इस जलती शमा को बुझाने
यूँ ही बुझा जाए, क्या हलवा समझा हैं

 

~ Kshitij Muktikar

 

Share This
0

ए खुदा तेरी रज़ा क्या है?

इन नसीहतों में मज़ा क्या है,
इन इनायतों में रखा क्या है,

जो मौलवी बने बैठे हैं यहाँ,
इनसे पूँछों इन्होंने करा क्या है।

भले आदमी का निशान क्या है,
असल नवाज़िश ए करम क्या है,

क्यों डरे भला क़यामत से इतना,
दर्द से निजात नहीं तो मौत क्या है,

इन तालिमों की वजह क्या है,
ए खुदा तेरी रज़ा क्या है,

हाँ मैं करता हूँ सवाल बोलो,
इन ग्रंथों में मेरी सज़ा क्या है।

~ Shubham Jain

 

Share This
0

एक इंसान

इंसानो का इंसानो से इंसानियत का वास्ता ही कुछ और है,
हर एक इंसान का इस दुनिया में रास्ता ही कुछ और है,

मूर्खो से मूर्खो की बाते मूर्खो को समझ न आयी
एक मुर्ख खुसिया के बोला क्या तू समझा मेरे भाई?

अन्धो से अन्धो का तो अजीब ही नाता है,
हर अँधा दूसरे अंधे के नैनो की गहराही में खो जाता है !

ऐसे इस घमासान में बेहरे भी कुछ कम नहीं इतराते ,
समझे सुने मुमकिन नहीं पर गर्दन जरूर हिलाते।

गूंगे न जाने शब्दों से रिश्ता कैसे निभाते है,
केवल होठों को मिटमिट्याते हुए कैसे वे बतियाते है?

कर से अपंग भी लालसा में झूल जाते है,
हाय रे ये आलसी जानवर बिस्तर न छोड़ पाते है!

सयाने इतराते कहते लंगड़े घोड़े पर डाव नहीं लगाते,
और दूसरे ही मौके पर दुसरो के तरक्की में रोड़ा अडकते।

किस्मत के मारो का तो क्या कहना, ये दिमाग से पैदल होते है,
सामर्थ्यवान इस देश की उपज है मानो सारा कुछ यही सहते है।

इससे तो अच्छा सचमें इनके आँख, कान, जबान, पैर और हाथ न होते,
दिमाग तो फिर भी ठीक था पर दिल को मन में संजोते,

ऐसे इस इंसान का फिर भी जग में उद्धार जरूर होता,
इंसान फिर इंसानियत से कभी वास्ता न खोता।

 

~ Aashish Jain

 

Share This
0

कितना Nalayak हूँ

पेशे से तो छात्र था.. अब Shayar हूँ
तुम्हे समझ सकता इस Layak हूँ
तुम्हारे लिए कितने ही झूठ बोले,
ज़रा सोचो कितना बड़ा Liar हूँ
पर तुम्हे समझ ना सका
Don’t you think कितना Nalayak हूँ

 

~ Piyush kr. Singh

 

Share This
0

मुश्किलों के दौर में थोड़ा संभल कर चलो

मुश्किलों के दौर में थोड़ा संभल कर चलो,
अनुभवों से सीख लो और निखर कर चलो।
कठिनाइयाँ तो आएंगी और चली जाएंगी,
सजग होकर इसी तरह नए सफ़र पर चलो।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

Share This
Page 2 of 159
1 2 3 4 5 6 7 159