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कितना Nalayak हूँ

पेशे से तो छात्र था.. अब Shayar हूँ
तुम्हे समझ सकता इस Layak हूँ
तुम्हारे लिए कितने ही झूठ बोले,
ज़रा सोचो कितना बड़ा Liar हूँ
पर तुम्हे समझ ना सका
Don’t you think कितना Nalayak हूँ

 

~ Piyush kr. Singh

 

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मुश्किलों के दौर में थोड़ा संभल कर चलो

मुश्किलों के दौर में थोड़ा संभल कर चलो,
अनुभवों से सीख लो और निखर कर चलो।
कठिनाइयाँ तो आएंगी और चली जाएंगी,
सजग होकर इसी तरह नए सफ़र पर चलो।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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आज उनसे फिर मुलाकात हुई

आज उनसे फिर मुलाकात हुई,
बीती हुई बातें कुछ ख़ास हुई।
ख़ुशी दिल में थी और चेहरे पर गम था,
अचानक इसी मिलन में बरसात हुई।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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सपने जीवन में अनमोल होते हैं

नींद में सपने दिखाई देते हैं, कभी कुछ अपने दिखाई देते हैं।
सपने जीवन में अनमोल होते हैं, कभी सपने सच्चे दिखाई देते हैं।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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अब तो टूट कर बिखरने की देरी हैं

हौसले जवाब दे रहे हैं, हारके उन हालातों से,
धीरे धीरे दूर हो रहा हूँ, अपने ही जज़्बातों से,
अब तो टूट कर बिखरने की देरी हैं….
आजा संभाल ले, इन हाथों को उन हाथों से

 

~ Piyush kr. Singh

 

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माँ बाप के लिए बच्चो को सीख

दो घड़ी के लिए

दो घड़ी के लिए, बैठ जाया करो।
मां बाप के पास भी कभी आया करो।

 

दो घड़ी के लिए……..।।

 

कभी उंगली पकड़कर, चलना सिखाया था।
कभी उनको भी बाहर घुमाया करो।

 

दो घड़ी के लिए…….।।

 

प्यार के दो बोल, अनमोल हैं।
प्यार से कभी तुम, मनाया करो।

 

दो घड़ी के लिए……..।।

 

माना तुम पढ़ लिखकर, इंसान हो गए।
कभी तो इंसानियत, दिखाया करो।

 

दो घड़ी के लिए……..।।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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