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आजकल के आशिक़ और उनकी आशिकी पर शायरी

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सपना देखते हैं रात को आशिकी का
और डरते हैं की जल्दी सुबह ना हो
माशूक़ ढूंढते हैं खूबसूरत कोई…
और डरते हैं की वो बेवफा ना हो

 

 

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