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शराब से ज्यादा नशीली आंखें

कैसे मैं बताऊं किस कदर उसके सपने सजते है,
उसके दिलकश नजारो के आगे चाँद तारे भी फ़िके लगते है।
शराब से ज्यादा नशीली है उसकी आंखें,साहब..,
तुम क्या जानो हमको पता है हम कैसे बचते है…

 

~ रवि मिश्रा

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