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फ़ंसा आदमी माया में

हंसना रोना खोना पाना, सब जीवन के रंग।
फ़ंसा आदमी माया में है कभी दुख है कभी उमंग।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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