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माँ तुझसे ये दुनिया मेरी, तुझसे ही जीवन, माँ पर कविता

मेरे वज़ूद की कहानी वो, मेरे सर पे जिसका साया हैं,
माँ तुझसे ये दुनिया मेरी, तुझसे ही जीवन पाया हैं,

हर एहसास तुझसे ही जाना मैने इस जहाँ में आके
है कर्ज़दार उसका ये बेटा, दूध जो तूने पिलाया हैं

पहला लफ्ज़ तू बनी मेरे जीवन का, खुदा के करम से,
पकड़ मेरे हाथों को, मुझे संभलना सिखाया हैं

मेरे एक छींक पे तड़पना तेरा, कितनी रात तू सोई नहीं
खुद को जला दोपहर भर, तेज धुप से बचाया हैं

हूँ आज मैं अपने क़दमों पे, जहाँ को पार कर के,
हूँ पर तेरे क़दमों में, जिससे हर सीख को पाया हैं

तेरी ममता का प्यासा हूँ, लुटा दे मुझपे “सच्चा प्यार”
पूजता हूँ तुझे ऐसे, की भगवन की जगह बिठाया हैं

है दुआ ऊपर वाले से, गर वो इस जहाँ में कही है
रखे सदा खुश उसे, जिसने मुझे दुनिया में लाया हैं

मेरे वज़ूद की कहानी वो, मेरे सर पे जिसका साया हैं,
माँ तुझसे ये दुनिया मेरी, तुझसे ही जीवन पाया हैं,

 

~ कुनाल

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