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ज़िन्दगी में जो चाहते है साला वो ही नहीं मिलता

 

जिन आँखों में ख्वाब रहा करते थे उनमें ये डर कैसा है?
जिस घर मुझे घर सा नहीं लगता ये मेरा घर कैसा है?

नाज़ुक सी ज़िन्दगी इतने कठोर सवालो से भरी क्यों है?
जो मुझे चाहिए वो किसी और की बाहों में भरी क्यों है?

इन सवालो के जवाब में नए सवाल क्यों है?
वो भी एक आम सा ही लड़का होगा आखिर
उसके लिए इतना बवाल क्यों है?

मेरी तरह क्यों कोई नहीं मिलता ?
दिल मिलकर दिल क्यों नहीं मिलता ?

हमसे ज़िन्दगी कुछ खास मोहब्बत करती है क्या?
जो चाहते है साला वो ही नहीं मिलता….

 

~ रोहित सुनार्थी

 

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तु मेरे रब की तरह

देख के तुझे कितना सुकून मुझे मिलता है
ये सिर्फ मैं जानता हूँ।

 

हैं तु क्या चीज,
ये सिर्फ मैं जानता हूँ।

 

हैं तेरा क्या वजूद इस जहा में
ये सिर्फ मैं जानता हूँ।

 

भले ही कुछ ना हो तु ,
दुनिया की नजरों मे
क्या है तेरा वजूद,
ये सिर्फ मैं जानता हूँ।

 

सिखा है मैंने तुझसे बहुत कुछ,
क्या है तु ये सिर्फ मैं जानता हूँ।

 

दिया है तुने मुझे कितना,
क्या है तेरे पास ये सिर्फ मैं जानता हूँ।

 

हैं तेरा ही अहसास इस दिल को,
प्यार हैं या कुछ ओर ये सिर्फ मैं जानता हूँ।

 

समायी है तु मेरी हर ख्वाईशों में,
हैं तु मेरे रब की तरह,
ये सिर्फ मैं जानता हूँ।

 

~ स्वामी गंगानिया

 

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धूप में चलना, रेत में जलना प्रेरणादायक स्टेटस

 

धूप में चलना पड़ेगा।
रेत में जलना पड़ेगा।
राह में यदि शूल आएं।
पुष्प बन मिलना पड़ेगा।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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मैं आया हूँ तुम में डूब जाने के लिए

 

कौन आया है यहां उम्र बिताने के लिए,
मैं तो आया हूँ यहां इश्क जताने के लिए
मुझे सफीने को अब, भंवर से यूं निकलनी नही,
मैं तो इस जहां में आया हूँ, तुम में डूब जाने के लिए

 

~ अंकुर सिंह

 

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घरों की आग | Deep sad lines

 

दिल में लगी है आग, बताएं कैसे।
गमों का आशियाना, दिखाएं कैसे।
बताएं या छुपाए, हार अपनी है।
अपने घरों की आग, बुझाएं कैसे।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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अधूरा जीवन ~ Heart Touching Deep Lines

Adhura Jeevan Sad Hindi Poem

 

 

ज़िन्दगी को पूरी तरह से जीने की कला,
भला किसे अच्छे से आती हैं……
कही ना कहीं ज़िन्दगी में,
हर किसी के कोई कमी तो रह जाती हैं….

 

प्यार का गीत गुनगुनाता हैं हर कोई,
दिल की आवाज़ों का तराना सुनाता हैं हर कोई,
आसमान पर बने इन रिश्तो को निभाता है हर कोई,
फिर भी हर चेहरे पर वो ख़ुशी क्यों नहीं नजर आती हैं…
पूरा प्यार पाने में कुछ तो कमी रह जाती हैं….
हर किसी की ज़िन्दगी में कही ना कही कुछ तो कमी रह जाती हैं….

 

दिल से जब निकलती हैं कविता…
पूरी ही नजर आती हैं ….
पर कागजों पर बिछते ही
वो क्यों अधूरी सी नजर आती हैं
शब्दों के जाल में भावनाएं उलझ सी जाती हैं
प्यार, किस्सें, कविता…ये सिर्फ दिल को ही तो बहलाती है
अपनी बात समझाने में तो कुछ तो कमी रह जाती हैं

 

हर किसी की निगाहें मुझे क्यों…….
किसी नयी चीज़ो को तलाशती नजर आती हैं
सब कुछ पा कर भी एक प्यास सी क्यों रह जाती हैं
ज़िन्दगी में कही ना कही कुछ तो कमी रह जाती हैं
सम्पूर्ण जीवन जीने की कला भला किसे आती है…..

 

~ रंजना

 

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