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Jo pahle jitna hasta fir utna hi rota h

सच हमेशा कड़वा होता है
चैन तो इस दिल का खोता है

मीठे सपनों की ज़मीन पर
पेड़ क्यों नीम का बोता है

पहले जो हँसता है जितना
वहीं बाद में उतना रोता है ।

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