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दर्द और मेरी ज़िन्दगी का रिश्ता

कैसे छिपाऊँ मैं मेरे दर्द को, दिल का इस पर पहरा हैं|
दर्द और मेरी ज़िन्दगी का रिश्ता, बहुत ही गहरा हैं |

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दुखो के बोझ में ज़िन्दगी

दो लाइन्स उनके लिए जो ज़िन्दगी के दुखो से परेशान हैं, ज़िन्दगी की उलझनों में फंस गए हैं:

 

“दुखो के बोझ में ज़िन्दगी कुछ इस तरह डूबे जा रही हैं
की मेरी हर एक चाहत, हर एक आस टूटे जा रही हैं|”