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दर्द-ए-दिल और ये आँखें वीरान

कसम से सब्र की इन्तहा हो चली हैं
दर्द-ए-दिल कहना हैं अब मुश्किल
और येह आँखें वीरान हो चली हैं

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सिर्फ चाह लेने से कोई अपना नहीं होता

बंद होती आँखों में कोई सपना नहीं होता
सिर्फ चाह लेने से कोई अपना नहीं होता

Band hoti ankho me koi sapna nhi hota
Sirf Chah lene se koyi apna nahi hotaa

 

~ Akshat Rajvi