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ज़िन्दगी पर अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रसिद्ध कविता

सच्चाई यह है कि
केवल ऊँचाई ही काफ़ी नहीं होती,
सबसे अलग-थलग,
परिवेश से पृथक,
अपनों से कटा-बँटा,
शून्य में अकेला खड़ा होना,
पहाड़ की महानता नहीं,
मजबूरी है।
ऊँचाई और गहराई में
आकाश-पाताल की दूरी है।

जो जितना ऊँचा,
उतना एकाकी होता है,
हर भार को स्वयं ढोता है,
चेहरे पर मुस्कानें चिपका,
मन ही मन रोता है।

– अटल बिहारी वाजपेयी

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भारतीय जनता के लिए अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रसिद्ध कविता

क़दम मिला कर चलना होगा

बाधाएँ आती हैं आएँ
घिरें प्रलय की घोर घटाएँ,
पावों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ,
निज हाथों में हँसते-हँसते,
आग लगाकर जलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।

हास्य-रूदन में, तूफ़ानों में,
अगर असंख्यक बलिदानों में,
उद्यानों में, वीरानों में,
अपमानों में, सम्मानों में,
उन्नत मस्तक, उभरा सीना,
पीड़ाओं में पलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।

उजियारे में, अंधकार में,
कल कहार में, बीच धार में,
घोर घृणा में, पूत प्यार में,
क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में,
जीवन के शत-शत आकर्षक,
अरमानों को ढलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।

सम्मुख फैला अगर ध्येय पथ,
प्रगति चिरंतन कैसा इति अब,
सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ,
असफल, सफल समान मनोरथ,
सब कुछ देकर कुछ न मांगते,
पावस बनकर ढ़लना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।

कुछ काँटों से सज्जित जीवन,
प्रखर प्यार से वंचित यौवन,
नीरवता से मुखरित मधुबन,
परहित अर्पित अपना तन-मन,
जीवन को शत-शत आहुति में,
जलना होगा, गलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।

~ अटल बिहारी वाजपेयी

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पिता पर खूबसूरत कविता

पिता एक उम्मीद है, एक आस है
परिवार की हिम्मत और विश्वास है,
बाहर से सख्त अंदर से नर्म है
उसके दिल में दफन कई मर्म हैं।

पिता संघर्ष की आंधियों में हौसलों की दीवार है
परेशानियों से लड़ने को दो धारी तलवार है,
बचपन में खुश करने वाला खिलौना है
नींद लगे तो पेट पर सुलाने वाला बिछौना है।

पिता जिम्मेवारियों से लदी गाड़ी का सारथी है
सबको बराबर का हक़ दिलाता यही एक महारथी है
सपनों को पूरा करने में लगने वाली जान है
इसी से तो माँ और बच्चों की पहचान है।

पिता ज़मीर है पिता जागीर है
जिसके पास ये है वह सबसे अमीर है,
कहने को सब ऊपर वाला देता है
पर खुदा का ही एक रूप पिता का शरीर है।

– संदीप कुमार सिंह

Dard Bhari Sad Alone Boy Poetry

जो मिला मुसाफ़िर वो रास्ते बदल डाले
दो क़दम पे थी मंज़िल फ़ासले बदल डाले

आसमाँ को छूने की कूवतें जो रखता था
आज है वो बिखरा सा हौंसले बदल डाले

शान से मैं चलता था कोई शाह कि तरह
आ गया हूँ दर दर पे क़ाफ़िले बदल डाले

फूल बनके वो हमको दे गया चुभन इतनी
काँटों से है दोस्ती अब आसरे बदल डाले

इश्क़ ही ख़ुदा है सुन के थी आरज़ू आई
ख़ूब तुम ख़ुदा निकले वाक़िये बदल डाले

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Sad Poem on Garibi | गरीबी सबसे बड़ी सजा

खुशियों को हर कोई बाँट लेता हैं
पर किसी के गम को बांटना आसान नहीं होता

किसी जरुरतमंद की मदद करना इंसानियत हैं
ये किसी पर कोई एहसान नहीं होता

परिंदे भी लौट आते हैं आखिर में अपने बसेरे की ओर
पर कई इंसान ऐसे भी हैं जिनका कोई मकान नहीं होता

एक बच्चा सड़क के किनारे बैठ कुछ सोच रहा था
क्या गरीब बच्चो के दिल में कोई अरमान नहीं होता ?

ये बात सच हैं के हर एक का अपना अपना नसीब हैं
पर क्या कमजोर लोगो को देख मन कभी शर्मिंदा नहीं होता

आज के दौर में गरीबी से बड़ी कोई सजा नहीं
काश ऐसा हो के गरीबी का ही कोई नाम-o-निशान नहीं होता

~ Khwaish

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True But Sad Diwali Poems on India

आओ दिवाली मनाये हम
खुशियों का मौका हैं खुशिया मनाये हम

कभी धर्म, कभी जाति, कभी भाषा के नाम पर लड़े हम
फिर भी कहते हो दिवाली हैं, आओ हाथ मिलाये हम

आओ दिवाली मनाये हम

जला के औरो के घरो को इस दिवाली में
किस मुँह से अपने.. घरो को सजाये हम

आओ दिवाली मनाये हम

इस दिवाली सोया किसान का घर एक साथ खा के ज़हर
हमे इससे क्या, आओ बच्चो को अपने मिठाई खिलाये हम

आओ दिवाली मनाये हम

कोई मराठी, कोई पंजाबी, कोई तमिल, तो कोई बंगाली
आओ निकले इस दिवाली एक हिंदुस्तानी ढूंढ लाये हम

आओ दिवाली मनाये हम

मारा गया कल मुंबई में एक माँ का लाल नाम जिसका राहुल था
छोड़ो यारो उस अजनबी की मौत पे क्यों मातम मनाये हम

आओ दिवाली मनाये हम

सो रहा हैं देश मेरा, घायल आज ओढ़े हुए कफ़न
आओ यारो दीपक नहीं, उसकी चिता जलाये हम

आओ दिवाली मनाये हम
खुशियों का मौका हैं खुशिया मनाये हम

 

~ Sajid

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ईश्वर का दिया वरदान है माँ

जीवन की शुरुआत हैं माँ,
हर लम्हे में साथ हैं माँ,
खुशियों की बरसात हैं माँ,
डूबती नैया की पतवार हैं माँ,
प्यार करे तो दुर्गा हैं माँ,
गुस्सा करे तो काली हैं माँ,
हर रूप है निराला उसका,
चाहे वो हो दुर्गा माँ,
चाहे वो हो काली माँ,
मानो तो भगवन हैं माँ,
ईश्वर का दिया वरदान है माँ

~ लीना गोला

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अगर बस में मेरे होता

आसमान से तारे तोड़ लाता, अगर बस में मेरे होता
तेरे कदमो में जन्नत बिछाता, अगर बस में मेरे होता

तुझे दुनिया की सेर करा, एक नया ही जहां दिखलाता
तेरी राहों में फूल बिछाता, अगर बस में मेरे होता

तेरे ख्वाब की हक़ीक़त बन, सपने सारे सच कर जाता
तेरे दर्द को खुद पर झेल जाता, अगर बस में मेरे होता

मैं खुद को तेरा आईना और एक तस्वीर निराली बनाता
तेरे आंसू को अपनी आँखों से गिराता, अगर बस में मेरे होता

तेरे लिए एक ताजमहल बनवाता, प्यार मेरा सबको दिखलाता
खुदा बन तेरी हर एक दुआ पूरी करता, अगर बस में मेरे होता

कितनी मोहब्बत हैं तुमसे मुझे ये तुम्हे समझाने के लिए
अपना दिल तेरे दिल में धड़काता, अगर मेरे बस में होता

 

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सुन्दर पंक्तिया – ज़िन्दगी की सिख कविता

घबराने से मसले हल नहीं होते
जो आज है, वो कल नहीं होते।

ध्यान रखो इस बात का ज़रूर
कीचड़ में सब कमल नहीं होते।

नफ़ा पहुँचाते हैं जो जिस्म को
मीठे अक्सर वो फल नहीं होते।

जुगाड़ करना पड़ता है हमेशा
रस्ते तो कभी सरल नहीं होते।

दर्द की सर्द हवा से बनते हैं जो
वो ठोस कभी तरल नहीं होते।

नफ़रत की खाद से जो पेड़ पनपते हैं
मीठे उनके कभी फल नहीं होते।

जो आपको आपसे ज्यादा समझे
ऐसे लोग दरअसल नहीं होते।।

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Most Hot Sexy Romantic Seductive Poetry

होंठो पे अपने होंठ रख दूँ
आ तुझे मैं प्यार कर लू।

साँसों में साँसें घुल जाने दे
बाँहों में बाहें मिल जाने दे।

दो जिस्म हम, जान एक है
इरादे मेरे आज नहीं नेक है।

आग लग रही है, तन-बदन में
जल रहा हूँ मैं प्रेम अगन में।

लबों पे अपने लब रख दूँ
आ तुझे मैं प्यार कर लू।

एक दूजे में खो जाने दे
मुझको तेरा हो जाने दे।

आग लग रही है, तन और मन में
सुलग रहा हूँ मैं, बरसते सावन में।।

चलो ना पूरी तरह बहक जाते है
ताक़त आज अपनी आज़्माते है।

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