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Shayari Ek Diwane Ki

ज्यादा देर यूँ एक जगह नहीं रूकता हूँ मैं
बंजारों का कभी कोई ठिकाना हुआ है क्या

दीवानों की बातें भला कोई समझे तो कैसे
दीवानों का कभी कोई दीवाना हुआ है क्या

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