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तेरी आँखों में नहीं, तेरी रूह में बस्ता हूँ

तेरी दुआओं का असर है, जो अब तक मैं सलामत हूँ.!
तेरी आँखों की नमी नहीं, हाथों की लकीरों में बस्ता हूँ
मैं जानता हूँ जान-ए-जहाँ, तुझे बस मोहब्बत है मुझ से
तेरी साँसों की राह पकड़…., तेरी रूह में बस्ता हूँ….|

~ Ravinder Ravi (Sagar)

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