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बादलो में इंद्र धनुष की तरह

बाहर से सूरज की गर्मी की तरह
अंदर से बारिश की बूंदो की तरह
क्या बोलू उसके बारे में..वो तो हैं
घने बादलो में इंद्र धनुष की तरह

~ सिद्धार्थ

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  1. ख़ामोशी में चाहे जितना बेगाना-पन हो..
    लेकिन इक आहट जानी-पहचानी होती है.!! janukisms.com

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