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जिस्म नहीं रूह को चाहा हैं

कितना कोमल हैं हुस्न उसका
ये तो जानता खुदा भी नहीं
हमने चाहा हैं उसकी रूह को
जिस्म तो कभी चाहा ही नहीं

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  1. Kash Takdeer Bhi Hoti julfo Ki Tarah,
    Jab Jab Bikharti, tab tab Sawaar Lete

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