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बनो इंसान पहले, छोड़ कर बात मज़हब की

लुटेरा है अगर आज़ाद तो अपमान सबका है
लुटी है एक बेटी, तो लुटा सम्मान सबका है.
बनो इंसान पहले छोड़ कर तुम बात मज़हब की
लड़ो मिलकर दरिंदो से ये हिन्दोस्तान सबका हैं

~ Justice for Asifa

1

क्या प्यार में सोचा था, क्या प्यार में पाया हैं

क्या प्यार में सोचा था, क्या प्यार में पाया हैं,
तुझको मिलाने की चाहत में, खुद को मिटाया हैं,
इस पर भी कोई इलज़ाम, ना तुझ पर लगाया हैं
मेरी ही ख्वाईशो ने, आज मुझे अर्थी पर सुलाया हैं

3

हर किसी को हम प्यार कर लें इतना आवारा मत समझो

मेरा दिल किसी के प्यार को तरसे इतना भी इसे नाकारा मत समझो,
और प्यार के लिए कोई न मिल पाए इतना भी इसे बेचारा मत समझो,
प्यार करने को तो दुनिया में लोगो की कमी हैं ही नहीं,
पर हर किसी को हम प्यार कर लें इतना भी हमे आवारा मत समझो

2

गर नजरो ने तेरी यूँ गिराया ना होता

ज़ख्मो पे मरहम कभी लगाया तो होता
मेरे आंसुओ के लिए दामन बिछाया तो होता

बदनामियों के बोझ से जब गर्दन झुक गयी
कन्धा अपना तुमने बढ़ाया तो होता

गिर गिर के संभल जाते फिर गिरने के लिए
अगर नजरो ने तेरी यूँ गिराया ना होता

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